Wednesday, February 18, 2026

सुपेबेड़ा में नहीं बदले हालात, किडनी की बीमारी से एक और ग्रामीण की मौत, मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 78 तक पहुंचा…

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में लोग नर्क की जिंगदी जी रहे हैं. किडनी प्रभावित सुपेबेड़ा गांव की अब तक न तस्वीर बदली और न ग्रामीणों की तकदीर बदली. आलम यह है कि एक के बाद एक ग्रामीण की हो रही मौत की कड़ी में आज एक और इजाफे के साथ संख्या 78 तक पहुंच गई है. किड़नी की बीमारी से पीड़ित पुरंधर ऑडिल की मौत से गांव में मातम पसर गया है.

दरअसल, सुपेबेडा गरियाबंद जिले का ऐसा गांव है, जिसकी पहचान किडनी प्रभावित के रूप में जग जाहिर है. पिछले 6 साल से यहां के लोग किडनी की बीमारी से मौत के गाल में समा रहे हैं. बीमारी से हो रही मौत की चर्चा खबरों के जरिए लोगों तक पहुंचने के बाद इस गांव में जनप्रतिनिधि भी आ चुके हैं, स्थिति में सुधारने की घोषणाएं कर चुके हैं, लेकिन इस गांव की स्थिति जस के तस बनी हुई है. लोगों को मौत ही नसीब हो रही है, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है.

गांव में फैली बीमारी की वजह दूषित पानी बताया जा रहा है. 23 दिसम्बर 2018 को गांव में शुद्ध पेयजल के लिए सरकार द्वारा तेल नदी से एक साल के भीतर पानी लाने की घोषणा की गई, लेकिन 3 साल बीतने के बाद टेंडर तक जारी नहीं हो पाया. गांव में लगे रिमूवल प्लांट भी देखभाल के अभाव में धूल खा रहे हैं. नतीजा आज भी लोग हैंडपंप या फिर झिरिया का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं.

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