मैं हिन्दी हूँ ।।*
*************
मैं सूरदास की दृष्टि बनी
*तुलसी हित चिन्मय सृष्टि बनी*
मैं मीरा के पद की मिठास
*रसखान के नैनों की उजास*
मैं हिन्दी हूँ ।।
*मैं सूर्यकान्त की अनामिका*
मैं पन्त की गुंजन पल्लव हूँ
*मैं हूँ प्रसाद की कामायनी*
मैं ही कबीरा की हूँ बानी
*मैं हिन्दी हूँ ।।*
खुसरो की इश्क मज़ाजी हूँ
*मैं घनानंद की हूँ सुजान*
मैं ही रसखान के रस की खान
*मैं ही भारतेन्दु का रूप महान*
मैं हिन्दी हूँ ।।
*हरिवंश की हूँ मैं मधुशाला*
ब्रज, अवधी, मगही की हाला
*अज्ञेय मेरे है भग्नदूत*
नागार्जुन की हूँ युगधारा
*मैं हिन्दी हूँ ।।*
मैं देव की मधुरिम रस विलास
*मैं महादेवी की विरह प्यास*
मैं ही सुभद्रा का ओज गीत
*भारत के कण-कण में है वास*
मैं हिन्दी हूँ ।।
*मैं विश्व पटल पर मान्य बनी*
मैं जगद् गुरु अभिज्ञान बनी
*मैं भारत माँ की प्राणवायु*
मैं आर्यावर्त अभिधान बनी
*मैं हिन्दी हूँ।।*
मैं आन बान और शान बनूँ
*मैं राष्ट्र का गौरव मान बनूँ*
यह दो तुम मुझको वचन आज
*मैं तुम सबकी पहचान बनूँ*
मैं हिन्दी हूँ।।lllllllllll


