रायपुर | छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को कोरबा जिले में अमानक चावल की खरीदी का मामला छाया रहा। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप द्वारा उठाए गए इस सवाल पर सदन में तीखी बहस हुई। विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर आम जनता की सेहत से खिलवाड़ बताते हुए सरकार को घेरा, जिसके बाद संतोषजनक जवाब न मिलने पर कांग्रेसी विधायकों ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।
8000 क्विंटल खराब चावल, करोड़ों का दांव
विधायक व्यास कश्यप ने सदन में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर कितनी मात्रा में अमानक चावल खरीदा गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। जवाब में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने स्वीकार किया कि कोरबा जिले में जाँच के दौरान 8,000 क्विंटल से अधिक अमानक चावल की पुष्टि हुई है। इस चावल की बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़ 34 लाख रुपये बताई गई है।
एक्शन में सरकार: अधिकारी निलंबित, 10 को नोटिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य मंत्री ने कड़ी कार्रवाई का ब्यौरा पेश किया:
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निलंबन: संबंधित अधिकारी प्रमोद जांगड़े को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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कारण बताओ नोटिस: विभागीय जाँच के दायरे में आए 10 अन्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
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वैज्ञानिक जाँच: चावल की गुणवत्ता की सटीक पुष्टि के लिए FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से भी परीक्षण कराया गया है।
विपक्ष का आरोप- ‘बड़ों को बचाने की कोशिश’
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कार्रवाई की टाइमिंग और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर गाज गिराकर बड़े दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस विधायकों ने इस मामले में उच्चस्तरीय जाँच की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की और सदन की कार्यवाही से वॉकआउट कर दिया।
“अमानक चावल का सीधा असर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर पड़ता है। यह भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि गरीब जनता के निवाले के साथ धोखा है।” — व्यास कश्यप, कांग्रेस विधायक



