जोशीमठ केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा:शंकराचार्य ने याचिका लगाई, कहा- सरकार ने समय पर ध्यान नहीं दिया; मलबे में बदल सकता है शहर

जोशीमठ मामले में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल की है। उन्होंने कहा- ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक नगरी जोशीमठ खतरे में हैं। यहां पिछले एक साल से जमीन धंसने के संकेत मिल रहे थे। सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया गया।

हिमालय में जो कुछ हो रहा है, उसको लेकर लंबे समय से चिंता जताई जा रही थी। शासन-प्रशासन ने इसकी अनदेखी की, जिसकी वजह से अब जमीन धंसने लगी है। सरकार जमीन धंसने के सही कारण का पता लगाना चाहिए और इससे प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत पहुंचाने और उनके पुनर्वास का प्रबंध करना चाहिए।

पुराने ग्लेशियर पर बसा जोशीमठ, जरा-सी चूक जानलेवा
उत्तराखंड का जोशीमठ धंस रहा है। यहां के 561 घरों में दरारें आ गई हैं। 4,677 वर्ग किमी में फैले इलाके से करीब 600 परिवारों को निकालने का काम चल रहा है। करीब 5 हजार लोग दहशत में हैं। उन्हें डर है कि उनका घर कभी भी ढह सकता है। सबसे ज्यादा असर शहर के रविग्राम, गांधीनगर और सुनील वार्ड में है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जोशीमठ के मकानों में दरार आने की शुरुआत 13 साल पहले हो गई थी। हालात काबू से बाहर निकले तो NTPC पॉवर प्रोजेक्ट और चार धाम ऑल वेदर रोड का काम रोकने के आदेश दे दिए गए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्लास्टिंग और शहर के नीचे सुरंग बनाने की वजह से पहाड़ धंस रहे हैं। अगर इसे तुरंत नहीं रोका गया, तो शहर मलबे में बदल सकता है।

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