इजराइल और हमास जंग के बीच भारत ने फिलिस्तीन में इजराइली कब्जे के खिलाफ पेश किए गए प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को UN में एक प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें फिलिस्तीन के ईस्ट यरूशलम, सीरियाई गोलन समेत फिलिस्तीनी इलाकों पर इजराइली कब्जे की निंदा की गई थी।
इस प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 145 देशों ने वोट किया। वहीं करीब 7 देशों ने इसके खिलाफ तो वहीं 18 देश वोटिंग से दूर रहे। शनिवार को इजराइली PM नेतन्याहू ने साफ कर दिया कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी को गाजा नहीं सौंपेंगे। गाजा पर हमारी सेना का ही कंट्रोल होगा। यहां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए हमें अंतरराष्ट्रीय ताकतों पर विश्वास नहीं है।
नेतन्याहू ने रक्षा मंत्री योव गैलेंट के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘इजराइल हमास को मिटाकर रहेगा, फिर चाहे इसके लिए हमें दुनिया के खिलाफ ही क्यों न जाना पड़े। सेना के खिलाफ कोई भी झूठे दावे, या प्रेशर हमें ऐसा करने से रोक नहीं सकता। इस जंग के बाद गाजा की तरफ से इजराइल को कोई खतरा नहीं होगा।’

सीजफायर पर समिट के लिए सऊदी पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति
दूसरी तरफ, सऊदी अरब और ईरान ने शनिवार को साथ आकर गाजा में सीजफायर की मांग की। दशकों बाद ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी जंग पर बातचीत के लिए सऊदी की राजधानी रियाद पहुंचे। यहां सीजफायर से जुड़ी एक बैठक में अरब देशों ने इजराइल पर हथियारों को लेकर प्रतिबंध लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति के लिए फिलिस्तीनी मुद्दे को हल करना बेहद जरूरी है।
ईरान के राष्ट्रपति रईसी ने बैठक के दौरान इजराइली सेना को आतंकवादी संगठन करार दिया। इसके अलावा अरब देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि इजराइल फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ आतंक फैला रहा है। हालांकि, सभी अरब देश उस प्रस्ताव के समर्थन में नहीं आए जिसमें इजराइल पर दबाव बनाने के लिए उसे तेल सप्लाई बंद करने की बात कही गई थी।



