रायपुर. राजधानी में एक परिवार ने एम्स हॉस्पिटल को शरीर दान करने का घोषणा पत्र भरा है. बेटे ने अपने शरीर के साथ अपने माता, पिता का मरने के बाद शरीर दान करने की घोषणा की है. बेटा प्रेम कुमार ने कहा, जहां से मेरा घर परिवार चल रहा हैे वहां के लिए मैं काम आता हूं तो यह मेरे लिए सौभाग्य है.
प्रेम ने कहा, एम्स में डॉक्टर तैयार किए जाते हैं. ऐसे में बॉडी की जरूरत होती है. मरने के बाद मेरा शरीर एक्सपेरिमेंट करने का काम आएगा. हमारे अंग जरूरतमंदों को मिलेगा तो मैं मरकर भी जिंदा रहूंगा. उन्होंने बताया कि वह 2012 से एम्स में ठेका कर्मचारी के रूप में काम कर रहा है.
वर्तमान समय में जब एक परिवार का व्यक्ति अपने परिवार के ही लोगों को अपना अंग देने में कतराते हैं और मुंह मोड़ लेते हैं, ऐसे समय में सहपरिवार हॉस्पिटल को शरीर दान देना एक साहसी कदम से कम नहीं है. दरअसल पूरा मामला राजधानी रायपुर एम्स हॉस्पिटल का है, जहां पिछले 2012 से ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी प्रेम कुमार ने अपना ही शरीर नहीं बल्कि अपने मम्मी पापा के शरीर को एम्स हॉस्पिटल रायपुर को दान करने का घोषणा पत्र भरा है.शरीर दान करने वाले प्रेम कुमार और उनके माता-पिता दिलीप कुमार, पद्मावती ने कहा कि हम मरने के बाद भी किसी का काम आ जाएं, इससे बड़ा और क्या हो सकता है. हॉस्पिटल में विभिन्न शोध कार्य एवं उपचार की जानकारी के लिए शरीर की आवश्यकता होती है, जिसे देखते हुए हम अपना शरीर दान किए हैं. उन्होंने कहा कि मरने के बाद भी जीवित रहने का यह सबसे बड़ा माध्यम है. हमारे विभिन्न अंग अंतिम समय तक सही सलामत रहा तो हम दूसरे जरूरतमंद के माध्यम से जीवित रहेंगे और उस व्यक्ति को भी जीवनदान मिलेगा.


