Tuesday, February 17, 2026

कोयले के आभाव व महंगे औद्योगिक डीजल से उद्योग जगत में छाया गंभीर ऊर्जा संकट

कोरबा (छ.ग.गौरव)। कोविड महामारी के पश्चात संपूर्ण विश्व को उम्मीद थी शनैः शनैः जीवन पटरी पर आएगा और पुनः हम चहुमखी विकास की ओर अग्रसर होंगे। प्रयास भी हुए परंतु इसी दौरान रूस यूक्रेन के मध्य प्रारंभ हुए युद्ध ने संपूर्ण विश्व को चौका दिया। दो राष्ट्रों के बीच प्रारंभ हुए युद्ध ने अपने पडोसी कई छोटे राष्ट्रों को चपेट में ले लिया। रूस व यक्रेन के मध्य जारी युद्ध का सर्वाधिक घातक प्रभाव संपूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था पर परिलक्षित होने लगा है। विश्व की अर्थव्यवस्था में सभी देश आर्थिक ताने बाने में कहाँन कहाँ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष |रूप से एक दूसरे से जुड़े हुए है। यहीं कारण है कि युद्ध से अनेक देशों की विशेषकर रूप यूक्रेन के मित्र राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था पर विपरित प्रभाव पड़ा है। युद्ध के फलस्वरूप भारत में भी कच्चा तेल, पेट्रोलियम पदार्थों, औद्योगिक डीजल की कीमतों में एकाएक अप्रत्याशित वृद्धि का असर देश की औद्योगिक जगत पर पड़ा है। अचानक बढ़ी इस महंगाई से उद्योग जगत लडखड़ा गया है।

देश का औद्योगिक जगत कोविड-19 के पश्चात अभी ठीक से श्वांस भी नहीं ले पाया था कि उद्योग संचालन के लिए आवश्यक पेट्रोलियम पदार्थो की बढ़ती कीमत व देश में कोयले की अर्याप्त उपलब्धता से उद्योग दम तोड़ने की कगार पर आ पहुंचे है। कोल इंडिया की कोल आपूर्तियों की नई नीतियों के फलस्वरूप देश के उद्योग जगत पर ऊर्जा का गंभीर संकट छाया हुआ है। जिसका दुष्परिणाम शीघ्र ही परीलक्षित होने लगेगा। उद्योग जगत पर ऊर्जा व उद्योग के संचालन में होने की वाली कठिनाईयों से संपूर्ण राष्ट्र की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। अर्थव्यवस्था के लडखड़ाने का सीधा प्रभाव आम जनता पर होता है। पहले ही बढ़ती महंगाईन ने आमजन की कमर तोड़कर रख दी है। इसके बाद उद्योग जगत के संचालन में महंगाई या ऊर्जा की अनुपलब्धा के फलस्वरूप कोई संकट उत्पन्न होता है तो जनता पर दोहरी मार होगी। भारत सरकार की कोयला उत्पादन करने वाली कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा अपनी |अनुषंगी कंपनियों को जारी एक आदेश के फलस्वरूप केप्टिव पावर प्लांट (सीपीपी) आधारित निजी उद्योग पर गंभीर ऊर्जा संकट व्याप्त है।

भारत सरकार की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी आठ अनुषंगी कंपनियों के प्रमुखों को 17 मार्च, 2022 के जारी एक आंतरिक परिपत्र में इस बात के निर्देश दिए हैं कि पावर सेक्टर की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप वे 18 मार्च, 202: से कोयले का उत्पादन, भंडारण और वितरण सुनिश्चित करें ताकि मानसून के मौसम में भी |पावर सेक्टर को कोयले क निर्बाध आपूर्ति बनी रहे। कोल इंडिया के परिपत्र में जिस तर से नॉन पावर सेक्टर के लिए कोयले की आपूर्ति का खाक तैयार किया गया है वह जाहि तौर पर छत्तीसगढ़ और देश के बाहर स्थित सीपीपी आधारित उद्योगों के लिए बर्बादी क संदेश लेकर आया है।

कोयले का ऑर्डर बुक करने की सविधा दे रहा है। यानी कागजों पर 25 फीसदी कोयले की कटौती पहले से ही जारी है। जबकि जमीनी सच्चाई तो यह है कि उपभोक्ता एमएसक्यू का 75 फीसदी कोयला भी नहीं ले पा रहे। ऐसे में कोल इंडिया के 17 मार्च, 2022 के आंतरिक परिपत्र से उपभोक्ताओं को मिलने वाला एमएसक्यू का कोयला शून्य स्थिति में पहुंच जाएगा। छत्तीसगढ़ में| स्थापित सीसीपी आधारित उद्योगों की कोयला आपूर्ति को लेकर बिगड़ती स्थिति तब है जब छत्तीसगढ़ में कोयले का भंडार लगभग 56 बिलियन टनहेजो कि देश के कुल कोयला भंडारका तकरीबन 18 फीसदी है। वर्तमान में एसईसीएल द्वारा उत्पादित होने वाले कोयले का 95 फीसदी राज्य के बाहर भेजा रहा है। छत्तीसगढ़ के सीपीपी आधारित उद्योगों के खिलाफ यह एक बड़ा षड्यंत्र हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य के 250 से अधिक कैप्टिव विद्युत संयंत्रों पर आधारित उद्योगों के सुचारू संचालन के लिए प्रति वर्ष 32| मिलियन टन कोयले की आवश्यकता है जो कि एसईसीएल के उत्पादन का मात्र 19 प्रतिशत है। इन उद्योगों ने लगभग 4000 मेगावॉट के कैप्टिव पावर प्लांट स्थापित किए हैं जिनके लिए हर दिन लगभग 2 लाख टन कोयले की जरूरत है।

छत्तीसगढ़ राज्य के सीपीपी आधारित उद्योग, अनेक श्रमिक यूनियन और औद्योगिक संघ पहले ही कोल इंडिया की नीतियों के खिलाफ लामबंद हैं। समस्या की ओर छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का लगातार ध्यान आकृष्ट किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में राज्य में स्थापित सीसीपी आधारित उद्योगों के संरक्षण की महती| जिम्मेदारी राज्य सरकार पर आन पड़ती है। छत्तीसगढ़ के विकास की पहचान मुख्यतः कृषि व उद्योग ही है तथा इन्हीं दोनों के बलबूते। प्रदेश में रोजगार की बेहतर उपलब्धता बनी हुई है व लगातार कम होती बेरोजगारी दर ही प्रदेश की पहचान है। यह मांग की जा रही है। कि राज्य के संसाधनों पर पहला अधिकार स्थानीय उद्योगों का है।। ऐसे में उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर कोयला मिलना चाहिए। कोल इंडिया का गैरजिम्मेदाराना रवैया छत्तीसगढ़ केहजारोंकागमारों के हितों तथा राजस्व पर विपरीत असर डालने वाला साबित होगा। छत्तीसगढ़ में आज जरूरत इस बात की है कि राज्य के सीपीपी| आधारित उद्योगों को उनके हक का पूरा कोयला मिले। राज्य से बाहर भेजे जा रहे कोयले पर तत्काल रोक लगाई जाए।

.

Recent Stories