Delhi Blast : उमर नबी का नया वीडियो सामने, आत्मघाती हमले को “शहीदी ऑपरेशन” कहकर दे रहा है औचित्य

Delhi Blast : नई दिल्ली: दिल्ली के 10 नवंबर 2025 को लाल किला (Red Fort) के पास हुए कार विस्फोट की जांच में एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें मुख्य आरोपी उमर नबी आत्मघाती हमलों को धार्मिक और रणनीतिक रूप से पोस्ट-हमले के लिए जस्टिफाई कर रहा है। इस चौंकाने वाले क्लिप में वह अंग्रेजी में बोलते हुए कहता है कि “इस्लाम में आत्महत्या हराम है, लेकिन बम विस्फोट (बॉम्बिंग) जायज़ है”।

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वीडियो में क्या दिख रहा है?

नई आई वीडियो में उमर नबी एक कमरे में अकेले बैठा है और कैमरे के सामने आत्मघाती हमलों पर अपने विचार रख रहा है। लगभग 1 मिनट 20 सेकंड के इस क्लिप में उसने आत्मघाती हमले को “शहीदी ऑपरेशन” के तौर पर व्याख्यायित किया है:

  • उसने कहा है कि आत्मघाती हमलों की “मुख्य समस्या” मानसिक स्थिति है, जब कोई शख्स यह मान लेता है कि उसकी मृत्यु निश्चित समय और स्थान पर होगी।

  • इस विश्वास की वजह से, उमर नबी का कहना है, व्यक्ति “खतरे में रहता है” और इस चिंता में पड़ जाता है कि मौत ही उसकी एकमात्र मंजिल है।

  • वह अपने दर्शकों को डर से दूर रहने की सलाह देता है और “मौत से न डरें” जैसा भाव व्यक्त करता है।

इस प्रकार, यह वीडियो न सिर्फ उसकी मानसिक तैयारी दिखाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उसने अपने कदम को धार्मिक दृष्टिकोण से भी तर्कसंगत ठहराने की कोशिश की है।

जांच एजेंसियों की प्रतिक्रिया और बैकग्राउंड

  • जांच एजेंसियाँ NIA (National Investigation Agency) इस हमले को आत्मघाती हमला मानकर जाँ रही हैं।

  • रिपोर्ट्स के अनुसार, उमर नबी Pulwama, कश्मीर का रहने वाला था और उसका नाम हमले के संदिग्ध आत्मघाती बमबाज़ के रूप में सामने आया है।

  • उसकी फोन जांच में सामने आया है कि वह सोशल मीडिया के ज़रिए Jaish-e-Mohammed नामक आतंकी संगठन के यूथ को रेडिकलाइज कर रहा था।

  • जांचकर्ताओं ने CCTV फुटेज के ज़रिए उमर की दिल्ली में एंट्री का टाइमलाइन भी तैयार की है — वीडियो में दिखाया गया है कि उसकी आई20 कार बदरपुर बॉर्डर टोल पार कर दिल्ली में दाखिल हुई थी, और इसके बैक सीट पर एक बड़ा बैग था।

धार्मिक और रणनीतिक मायने

उमर नबी द्वारा रिकॉर्ड किया गया यह वीडियो जिहादी भाष्य का एक क्लासिक नमूना है, जिसे “मार्टिरीडम ऑपरेशन” (शहीदी ऑपरेशन) कहा जाता है — जहाँ आत्मघाती हमले को आत्महत्या नहीं बल्कि ईमानदारी और धार्मिक बलिदान के रूप में पेश किया जाता है। यह विचार कई आतंकवादी संगठनों द्वारा प्रचार माध्यम के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस क्लिप का मतलब ये भी हो सकता है कि उसने हमले से पहले न सिर्फ शारीरिक तैयारी की थी, बल्कि मानसिक और धार्मिक आधार तैयार किया था, ताकि उसके कदमों का औचित्य खूद और समर्थकों के लिए स्थापित हो सके।

समाज और सुरक्षा के लिए खतरनाक संकेत

  • यह वीडियो दर्शाता है कि भावनात्मक और धार्मिक बातों का आतंकवाद के लक्ष्य के लिए कैसे उपयोग किया जा सकता है।

  • न केवल व्यक्तिगत विश्वास, बल्कि सामूहिक रेडिकलाइजेशन की एक रूपरेखा भी सामने आती है — खासकर जब हमले के पीछे बड़े नेटवर्क और विचारधाराएँ जुड़ी हों।

  • जांच एजेंसियों के लिए यह वीडियो महत्वपूर्ण सबूत हो सकता है: न सिर्फ हमले के प्लान को समझने के लिए, बल्कि यह जानने के लिए भी कि आतंकी विचारधारा कैसे फैलायी जा रही है।

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