रायपुर: छत्तीसगढ़ में होली के त्योहार पर शराब की दुकानें खुली रहेंगी या बंद, इसे लेकर बनी असमंजस की स्थिति को आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने स्पष्ट कर दिया है। सरकार की नई आबकारी नीति (2026-27) के तहत इस बार होली को आधिकारिक ‘ड्राई डे’ की सूची से बाहर कर दिया गया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलेक्टरों को विशेषाधिकार दिए गए हैं।
ड्राई डे की लिस्ट से हटा होली का नाम
राज्य सरकार ने अपनी नई आबकारी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए साल भर में होने वाले 7 ड्राई डे की संख्या घटाकर 4 कर दी है।
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ये तीन दिन हटे: अब होली, मुहर्रम और 30 जनवरी (महात्मा गांधी निर्वाण दिवस) पर प्रदेश स्तर पर शराब बंदी का अनिवार्य आदेश नहीं होगा।
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ये चार दिन रहेंगे बंद: 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस), 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) और 18 दिसंबर (गुरु घासीदास जयंती) को दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी।
कलेक्टर के पाले में गेंद: मंत्री का बड़ा बयान
आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने स्पष्ट किया कि यद्यपि नीतिगत बदलाव किए गए हैं, लेकिन जिले की सुरक्षा और शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी कलेक्टर की होती है। मंत्री ने कहा:
“आबकारी नीति के तहत साल में 4 दिन दुकानें बंद रखने का प्रावधान है, लेकिन इसके अलावा कलेक्टर को भी साल में 3 दिन अपने विवेक से दुकानें बंद रखने का अधिकार दिया गया है। यदि किसी जिले में कलेक्टर को लगता है कि होली पर हुड़दंग या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है, तो वे स्थानीय स्तर पर शुष्क दिवस (Dry Day) घोषित कर सकते हैं।”
सरकार का तर्क: राजस्व और अवैध शराब पर लगाम
सरकार का मानना है कि होली जैसे बड़े त्योहारों पर शराब दुकानें बंद रहने से अवैध शराब की बिक्री (कोचियागिरी) बढ़ जाती है और जहरीली शराब का खतरा बना रहता है। दुकानें खुली रखने से न केवल सरकारी राजस्व बढ़ेगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शराब की उपलब्धता सुनिश्चित होने से अवैध व्यापार पर भी लगाम लगेगी।
विरोध के स्वर भी तेज
इस फैसले का विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि होली जैसे पवित्र और पारिवारिक त्योहार पर शराब दुकानें खोलना सामाजिक दृष्टि से उचित नहीं है और इससे विवादों की आशंका बढ़ेगी।


