रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने पार्टी संगठन में कसावट लाने के लिए जिला अध्यक्षों के लिए ‘रिपोर्ट कार्ड’ सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। दिल्ली में आलाकमान के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद रायपुर लौटे प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने स्पष्ट किया कि अब केवल पद पर बैठना काफी नहीं होगा, बल्कि हर तीन महीने में काम का हिसाब देना होगा।
क्या है ‘ग्रीन-यलो-रेड’ फॉर्मूला?
पार्टी ने जिला अध्यक्षों की कार्यक्षमता को मापने के लिए उन्हें तीन श्रेणियों में बांटने का निर्णय लिया है:
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ग्रीन कैटेगरी (Green): इसमें वे अध्यक्ष होंगे जिनका प्रदर्शन शानदार है, जो बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखने और सरकारी नीतियों के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने में सफल रहे हैं। इन्हें ‘सुरक्षित’ माना जाएगा।
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यलो कैटेगरी (Yellow): इस श्रेणी में उन अध्यक्षों को रखा जाएगा जिनका काम औसत है। इन्हें सुधार के लिए चेतावनी और समय दिया जाएगा।
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रेड कैटेगरी (Red): खराब प्रदर्शन करने वाले अध्यक्ष इस श्रेणी में आएंगे। रेड मार्क मिलने का मतलब होगा कि उनकी छुट्टी तय है और उनकी जगह नए चेहरे को मौका दिया जाएगा।
इन पैमानों पर तय होगी कैटेगरी
रिपोर्ट कार्ड तैयार करते समय कुछ प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा:
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बूथ कमेटियों का गठन: क्या जिले के सभी बूथों पर सक्रिय कार्यकर्ता तैनात हैं?
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आंदोलनों की सक्रियता: स्थानीय मुद्दों पर जनता के बीच पार्टी की मौजूदगी कितनी है?
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गुटबाजी पर लगाम: क्या अध्यक्ष जिले के सभी वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चल रहे हैं?
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सोशल मीडिया प्रजेंस: पार्टी की विचारधारा और केंद्र/राज्य सरकार की विफलताओं को जनता तक पहुँचाने में डिजिटल सक्रियता क्या है?
दीपक बैज का सख्त संदेश
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा, “पार्टी में अब जवाबदेही तय होगी। दिल्ली बैठक में साफ निर्देश मिले हैं कि जो काम करेगा वही पद पर रहेगा। हम हर तीन महीने में खुद समीक्षा करेंगे और इसकी रिपोर्ट हाईकमान को भेजी जाएगी। हमारा लक्ष्य संगठन को इतना मजबूत करना है कि हम हर चुनौती के लिए तैयार रहें।”


