रायपुर | 12 फरवरी, 2026 छत्तीसगढ़ सरकार ने वन संरक्षण और इको-टूरिज्म के क्षेत्र में एक नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया है। वन, सहकारिता एवं परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने आज ‘छत्तीसगढ़ संवाद’ ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य के मनेंद्रगढ़-चिरमरी-भरतपुर (MCB) जिले में स्थित गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क अब आधिकारिक तौर पर एशिया का सबसे बड़ा समुद्रीय जीवाश्म पार्क बन गया है।
29 करोड़ साल पुराना इतिहास: हसदेव नदी के तट पर मिली विरासत
मंत्री कश्यप ने जानकारी दी कि हसदेव नदी के किनारे लगभग एक किलोमीटर के दायरे में फैला यह पार्क करोड़ों साल पहले के समुद्री जीवन का गवाह है।
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अनोखी खोज: यहाँ पर्मियन युग (लगभग 280 से 290 मिलियन वर्ष पुराने) के समुद्री जीवों जैसे बाइवाल्व्स, गैस्ट्रोपॉड्स और क्रिनोइड्स के जीवाश्म सुरक्षित हैं।
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भू-वैज्ञानिक महत्व: इसे भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा राष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक स्मारक का दर्जा भी दिया गया है।
वन और वन्यजीव संरक्षण में मिली बड़ी कामयाबी
मंत्री केदार कश्यप ने पिछले दो वर्षों की विभागीय उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए कई महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए:
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बाघों की संख्या में वृद्धि: राज्य में बाघों की संख्या 2022 के 17 से बढ़कर अब 35 हो गई है, जो वन्यजीव संवर्धन की दिशा में एक बड़ी जीत है।
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हरित आवरण विस्तार: ‘भारतीय वन सर्वेक्षण 2024’ की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ के वन और वृक्ष आवरण (Green Cover) में 683 वर्ग किलोमीटर की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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इको-टूरिज्म का नया हब: मरीन फॉसिल पार्क के साथ-साथ बेमेतरा के गिधवा-परसदा को देश के प्रमुख पक्षी संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
वनवासियों की आजीविका पर जोर
केदार कश्यप ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल वनों का संरक्षण नहीं, बल्कि वनवासियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। उन्होंने बताया कि लघु वनोपज संग्रहण और इको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं।
“छत्तीसगढ़ की जैव विविधता अब अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर चमक रही है। मरीन फॉसिल पार्क न केवल वैज्ञानिकों के लिए शोध का केंद्र है, बल्कि यह दुनिया भर के पर्यटकों को राज्य की ओर आकर्षित करेगा।” > — केदार कश्यप, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री


