Wednesday, February 4, 2026

CG NEWS : प्रदेश के शिक्षकों को मिलेगी एआई और साइबर सुरक्षा की विशेष ट्रेनिंग, 50 घंटे का ऑनलाइन कोर्स अनिवार्य

CG NEWS : रायपुर। प्रदेश के शिक्षकों को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग और साइबर ठगी से बचाव के आधुनिक तरीके सिखाए जाएंगे। नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत प्रत्येक शिक्षक के लिए 50 घंटे की अनिवार्य ऑनलाइन ट्रेनिंग तय की गई है। यह प्रशिक्षण केवल सरकारी ही नहीं, बल्कि निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों के लिए भी अनिवार्य होगा।

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एनईपी के अनुरूप पाठ्यक्रम में किए गए व्यापक बदलावों को देखते हुए शिक्षकों को नई तकनीकों में दक्ष बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) इस प्रशिक्षण की कार्ययोजना तैयार कर रही है। सतत व्यवसायिक विकास (सीपीडी) कार्यक्रम के अंतर्गत यह ट्रेनिंग दीक्षा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन कराई जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि आगामी परीक्षाओं के बाद यह प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा।

प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल स्किल्स, टेक्नो-पेडागॉजी, डिजिटल वेलनेस, मीडिया लिटरेसी, वित्तीय सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और ड्रोन जैसे विषय शामिल होंगे। प्रत्येक मॉड्यूल के अंत में प्रश्नोत्तर होंगे और कोर्स पूरा करने के बाद अंतिम परीक्षा उत्तीर्ण करने पर शिक्षकों को डिजिटल सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।

ट्रेनिंग में शिक्षकों को लैपटॉप, डेस्कटॉप और मोबाइल की सुरक्षा, मजबूत पासवर्ड बनाने के तरीके, फर्जी कॉल और मैसेज की पहचान, सिस्टम अपडेट और एंटीवायरस के सही उपयोग की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही डिजिटल सिटीजनशिप, डिजि-लॉकर के प्रभावी उपयोग और ऑनलाइन व्यवहार से जुड़ी सावधानियों पर भी विशेष जोर रहेगा।

सूत्रों के अनुसार एससीईआरटी स्कूली पाठ्यक्रम में एआई को शामिल करने की तैयारी भी कर रहा है। विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से कक्षा 6वीं से एआई को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विचार चल रहा है। इस संबंध में कुछ माह पहले पाठ्य सामग्री तैयार करने को लेकर बैठक भी हो चुकी है।

इस पहल का उद्देश्य केवल शिक्षकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना नहीं है, बल्कि छात्रों को भी डिजिटल सुरक्षा और एआई के सही उपयोग के प्रति जागरूक करना है। बच्चों को अनजान लिंक से बचने, सोशल मीडिया के सीमित उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाएगी। पहले शिक्षक प्रशिक्षित होंगे और फिर वही ज्ञान वे छात्रों तक पहुंचाएंगे।

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