कोरबा, 10 मई 2025 –राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा जिला खनिज न्यास (DMF) में हुए अरबों रुपये के घोटाले की जांच तेज़ी से आगे बढ़ रही है। इस घोटाले में शामिल अधिकारियों की गिरफ़्तारियाँ और नाम सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो चुका है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं।
मुख्य आरोपी के रूप में सामने आए हैं भरोसा राम ठाकुर, जो तत्कालीन परियोजना समन्वयक और डीएमएफटी के नोडल अधिकारी थे। इनके अलावा तत्कालीन जनपद सीईओ राधेश्याम मिर्झा, व्ही.के. राठौर और भुनेश्वर सिंह राज के नाम भी इस घोटाले में सामने आए हैं। इन अधिकारियों ने कटघोरा, पाली और पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्रों में पदस्थ रहते हुए भारी गड़बड़ियां की हैं।
इस पूरे घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं, जब वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व रामपुर विधायक ननकीराम कंवर ने अप्रैल 2023 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर घोटाले की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि किस प्रकार कोरबा जिले में हर साल डीएमएफ फंड में अरबों की हेराफेरी हो रही है।
ननकीराम ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि वर्ष 2022-23 में शासी परिषद द्वारा अनुमोदित कार्यों को दरकिनार कर, व्यक्तिगत हितों के लिए मनमाने कार्य स्वीकृत किए गए। इन कार्यों का न तो धरातल पर कोई अस्तित्व है, न प्रशिक्षण दिया गया, न सामग्री वितरित की गई और न ही निर्माण कार्य संपन्न हुआ। सब कुछ सिर्फ कागज़ों में दिखाकर फर्जी भुगतान किए गए।
उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि इस घोटाले में तत्कालीन कलेक्टर और डीएमएफ अध्यक्ष संजीव झा, सीईओ एवं सचिव नूतन कंवर, और परियोजना समन्वयक भरोसा राम ठाकुर की मिलीभगत से अरबों रुपये का गबन किया गया है।


