नई दिल्ली। लोकसभा में चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान कोरबा के बढ़ते प्रदूषण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। कोरबा से सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत ने क्षेत्र की बिगड़ती पर्यावरणीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कोरबा में प्रदूषण की स्थिति दिल्ली से भी बदतर हो चुकी है। यहां का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) 400 के गंभीर स्तर पर पहुंच गया है, जो वायु और जल प्रदूषण का स्पष्ट संकेत है।
पावर प्लांट्स बने जिम्मेदार
सांसद महंत ने कोरबा की भयावह स्थिति के लिए क्षेत्र में संचालित पावर प्लांट्स को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि SECL, बालको, और NTPC जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले राखड़ और अन्य वेस्ट प्रोडक्ट पर्यावरण को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं।
“इन पावर प्लांट्स से उत्सर्जित राखड़ का एक छोटा हिस्सा ईंट निर्माण में उपयोग होता है, लेकिन अधिकांश राखड़ को अनियमित तरीके से डंप किया जा रहा है। इससे वायु प्रदूषण के साथ-साथ जलस्रोत भी दूषित हो रहे हैं,” उन्होंने कहा।
बीमारियों का बढ़ता खतरा
सांसद ने संसद में बताया कि कोरबा के लोग प्रदूषण के कारण गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं। फेफड़ों के रोग, त्वचा संबंधी समस्याएं और हृदय रोग जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। जल प्रदूषण की वजह से ग्रामीण इलाकों में पीने योग्य पानी की समस्या गहराती जा रही है।


