चंद्रयान-3 का लैंडर अभी भी मददगार:इसमें लगा लेजर उपकरण दशकों तक एक्टिव रहेगा, दुनियाभर के मून मिशन को दिशा दिखाएगा

चंद्रयान-3 पर लगा लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर एरे, यही लेजर किरणों के जरिए सिग्नल भेजता है।चंद्रयान-3 का विक्रम लेंडर अभी पूरी तरह नाकाम नहीं हुआ है। यह अब दुनियाभर के मून मिशन के लिए मददगार बन गया है। दरअसल, इस पर लगा लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर एरे (LRA) चंद्रमा के साउथ पोल पर लोकेशन मार्कर के रूप में काम कर रहा है। यह जानकारी भारतीय स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने शुक्रवार (19 जनवरी) को दी।

चंद्रयान-3 14 जुलाई 2023 को लॉन्च किया गया था। इसमें तीन हिस्से थे- प्रोपल्शन मॉड्यूल, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान। प्रोपल्शन मॉड्यूल को चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया गया था। लैंडर और रोवर ने 23 अगस्त को चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंडिंग की थी।

नासा के मिशन को मिला था सिग्नल
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लूनर रिकोनाइसेंस ऑर्बिटर (LRO) ने 12 दिसंबर 2023 को विक्रम लैंडर के LRA के जरिए रिफलेक्ट किए गए सिग्नल्स को कैच किया था। LRO ने इसका इस्तेमाल करके ही लेजर रेंज हासिल की। यह ऑब्जर्वेशन लूनर नाइट्स के दौरान हुआ, जब LRO चंद्रयान-3 की ओर बढ़ रहा था।

चंद्रयान-3 पर लगा लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर एरे, यही लेजर किरणों के जरिए सिग्नल भेजता है।
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