15 साल बाद न्याय: अब रहने लायक ही नहीं 174 मकान, दरवाजे टूटे, सड़क-नाली गायब

शनिवार शाम 4.35 बजे का यह नजारा जिला मुख्यालय के कुंदरूपारा वार्ड में आईएचएसडीपी (मलिन बस्ती विकास योजना) के तहत बने मकान का है। जिसे नगर पालिका कोर्ट से केस जीतने के बाद जल्द ही पात्र परिवारों (हितग्राहियो) को आवंटन करने का दावा कर रही है। लेकिन भास्कर टीम यहां पहुंची और नपा से रिकॉर्ड खंगाला तब सच्चाई यह सामने आई कि योजना के तहत 2008 में कुल 174 मकान तैयार तो हो चुके है, लेकिन इनमें 74 मकान में ताले लटके हुए हैं, दरवाजे टूटे हुए हैं।

इन मकानों के सामने खरपतवार उग गए हैं, नाली, सड़क दिखाई नहीं दे रही है। 100 मकान में लोग निवासरत हैं। लेकिन इनमें कई अपात्र की श्रेणी में हैं। भले ही नपा दावा कर रही है कि 174 में से 116 मकानों का आवंटन हो चुका है और 58 मकानों का जल्द आवंटन हो जाएगा। लेकिन जिन

उनमें से सिर्फ 18 परिवारों ने ही एक लाख 25 हजार 810 रुपए अंशदान राशि जमा किया है। वहीं 98 परिवारों ने अंशदान राशि जमा नहीं किया है। ऐसे में अब नपा ने दोबारा सर्वे कर पात्र हितग्राहियों को यहां शिफ्ट करने का प्लान बनाया है।

कुंदरूपारा में बने 174 मकानों का आवंटन 2018 से अब तक यानी 15 साल से अटका हुआ है। वजह यह है कि 3 एकड़ 45 डिसमिल जमीन में पक्का मकान बनाया गया है, लेकिन शिकारीपारा निवासी वीरेंद्र यादव एवं उनके परिवार के सदस्यों ने जमीन को अपना होने का दावा कर राजस्व मंडल बिलासपुर, सर्किट कोर्ट रायपुर में याचिका लगा दी थी। जिसके बाद कोर्ट में सुनवाई हुई और नपा के पक्ष में फैसला सुनाया गया। अब बाधाएं हट गई हैं, अब आवंटन हो सकता है। कोर्ट में जमीन विवाद होने की वजह से कोई कुछ नहीं कर पाया। जो पात्र थे, वे अब खुद के पैसे से मकान तैयार करवा चुके हैं।

116 परिवारों को मकान आवंटित किया गया है,

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