Thursday, February 19, 2026

आदिवासी स्कूल बंद, टीचर बन गए सफाईकर्मी, केरल सरकार ने एक झटके में 344 शिक्षकों को बना दिया स्वीपर

केरल के त्रिवेंद्रम की उषा कुमारी आदिवासी स्कूल के छात्रों को पढ़ाने के लिए नाव से नदी पार कर स्कूल जाती थीं। उषा अंबूरी के कुनाथुमाला स्कूल की इंचार्ज थीं। पिछले 23 सालों से उनके जीवन की एक ही दिनचर्या थी। वह अपने घर से निकल कर नाव चलाकर नदी का रास्ता तय करते हुए जंगल पहुंचती थीं। हाथी और तेंदुए जैसे खतरनाक जानवरों से भरे जंगल में 4 किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करती थीं। इसके बाद स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ाने से पहले उन्हें खाना खिलाती थीं। तब जाकर बाकी सभी विषय पढ़ाकर घर लौटती थीं।

नदी- जंगल पार कर 14 KM की दूरी तय करते हुए स्कूल जाती थी उषा कुमारी

आदिवासी बच्चों के बीच ज्ञान का दीप जलाने के लिए उषा जैसे कई टीचर इसी तरह से मेहनत कर बच्चों को पढ़ाने जाते थे। लेकिन केरल सरकार के एक फैसले ने इन सभी टीचर्स का जीवन ही पूरी तरह से बदल दिया है।

असल में, केरल सरकार ने राज्य के आदिवासी इलाकों में चल रहे मल्टी-ग्रेड लर्निंग सेंटर को बंद करने का फैसला लिया है। इन आदिवासी समुदाय के स्कूलों में पढ़ाने वाले करीब 344 सिंगल शिक्षकों को रातों-रात दूसरे विभाग में भेज दिया गया। 20 से 23 साल तक नौकरी करने वाली ये टीचर अब सफाईकर्मी का काम करेंगे। राज्य सरकार के शुक्रवार के इस फैसले से सिर्फ शिक्षक ही नहीं बल्कि बच्चों को भी परेशानी में डाल दिया है। कई लोगों ने ट्विटर पर भी उषा कुमारी के बारे में लिखा है।

‘मैंने बोला यह आखिरी क्लास है तो बच्चों को लगा मजाक कर रहीं हूं’
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शिक्षक की नौकरी जाने पर उषा कुमार कहती हैं कि उन्हें अब बच्चों के साथ रहना, उन्हें पढ़ाना और कुछ नया सिखाना याद आएगा। उन्होंने बताया, ‘जब मैंने बच्चों को शुक्रवार को बताया कि आज मेरी क्लास का आखिरी दिन है तो उन्हें लगा मैं मजाक कर रहीं हूं। गांव के लोगों को ऐसा भी लगा कि मैं कुछ हफ्ते बाद छुट्टी लेकर फिर वापस स्कूल आ जाऊंगी।’

गांव के लोगों को लगता है कि कुछ भी हो जाए मगर उषा कुमारी 14 किलोमीटर का रास्ता तय कर बच्चों को पढ़ाने जरूर आएंगी। ठीक वैसे ही जैसे पिछले 23 सालों से करती आ रही हैं।

सरकार के इस फैसले पर उषा कुमारी कहती हैं कि कई स्कूलों में शिक्षक बच्चों को सभी विषय नहीं पढ़ा पा रहे थे। अगर बच्चों के लिए कुछ बेहतर किया जाए तो यह उनके लिए अच्छा ही होगा। बच्चों तक अच्छी शिक्षा पहुंचना उनके भविष्य के लिए बहुत जरूरी है।

वह बताती हैं कि शिक्षक के पद से हटाते समय शिक्षा विभाग ने टीचर्स को यह कारण बताया कि उनमें से कई शिक्षकों ने खुद ग्रेजुएशन की पढ़ाई नहीं की है, इसलिए वह इस नौकरी के लिए फिट नहीं हैं।

बच्चों का पास के स्टडी सेंटर में कराया जाएगा दाखिला
आदिवासी इलाकों में मल्टी-ग्रेड लर्निंग सेंटर्स बंद करने के बाद राज्य सरकार अब इन बच्चों को एसएसके प्रोग्राम यानी समग्र शिक्षा केरल कार्यक्रम के तहत पास के स्कूल में दाखिला कराएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन बच्चों के घर से स्कूल की दूरी ज्यादा होगी उनके आने-जाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएंगे।

जबकि गांव वालों का मानना है कि इससे बच्चों के स्कूल जाने की संख्या घट जाएगी। सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार बताते हैं कि इससे पहले सरकार ने गोथरा सारथी प्रोजेक्ट शुरू किया था। जिसमें ट्रायबल बच्चों को पास के स्कूल पहुंचाने के लिए फ्री ट्रांसपोर्ट भी दिया जाता था। कोरोना के बाद से यह प्रोजेक्ट भी बंद पड़ा है।

शिक्षकों को दिया जाएगा 12 महीने का वेतन
उच्च शिक्षा प्रमुख सचिव ए पी एम मोहम्मद हनीश का कहना है कि सिंगल टीचर की भर्ती पर फैसला लेना अभी बाकी है। सरकार ने शिक्षकों को 12 महीने का वेतन देने का फैसला किया है। जनरल शिक्षा विभाग ने 500 सफाईकर्मियों की फुलटाइम और पार्टटाइम पदों पर भर्ती बंद कर दी है। मगर इस बारे में फैसला लेना अभी बाकी है कि इन पदों पर शिक्षकों को ही तैनात किया जाएगा या नहीं।

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