चिंतन मनन

एक पुस्तक कितनी भी पुरानी हो जाए उसके शब्द नहीं बदलते,
अच्छे संबंधों की भी यही पहचान है…
काँच के टुकडे बन कर रहेंगे तो कोई तुम्हें छुऐगा भी नहीं,
जिस दिन दर्पण बन जाओगे तो बिना तुम्हें देखे कोई रहेगा भी नहीं..!!

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