- बड़ी बरामदगी: जवानों ने सर्चिंग के दौरान एक INSAS राइफल, भारी मात्रा में कारतूस और नक्सल साहित्य जब्त किया।
- टारगेट मिस: नक्सली कैडर हिड़मे और मंगेश की मौजूदगी की खबर थी, लेकिन जवानों के आने की भनक लगते ही वे फरार हो गए।
- हॉटस्पॉट: छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर और महाराष्ट्र के बस्तर सीमा पर चल रहा है बड़ा सर्च ऑपरेशन।
CG News , मोहला-मानपुर — छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा पर सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ा ‘ऑफेंसिव’ ऑपरेशन चलाया। खुफिया इनपुट मिला था कि कुख्यात नक्सली हिड़मे और मंगेश अपने तीन साथियों के साथ इस इलाके में छिपे हैं। जवानों ने जंगल की घेराबंदी की, लेकिन नक्सली ‘डिफेंसिव’ मोड में आते हुए मुठभेड़ से पहले ही घने जंगलों का फायदा उठाकर भाग निकले।
ग्राउंड जीरो अपडेट: जंगल में छूटा नक्सलियों का गियर
मोहला-मानपुर पुलिस को सटीक जानकारी मिली थी कि महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर नक्सलियों की एक छोटी टुकड़ी किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए जमा हुई है। डीआरजी (DRG) और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने टारगेट एरिया पर धावा बोला। जवानों के पहुंचने से पहले ही नक्सलियों ने अपनी लोकेशन बदल ली, लेकिन हड़बड़ी में वे अपनी INSAS राइफल और जिंदा कारतूस पीछे छोड़ गए। सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में दैनिक उपयोग की सामग्रियां और नक्सली दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस अधीक्षक वाय. पी. सिंह ने पुष्टि की है कि नक्सली कैडर काफी करीब थे और जवानों के दबाव के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा।
“नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर हमने तुरंत टीम भेजी थी। हमारी बढ़त देख नक्सली भाग खड़े हुए। मौके से हथियार और गोला-बारूद की बरामदगी यह साबित करती है कि वे किसी बड़ी वारदात की तैयारी में थे। इलाके में सर्चिंग जारी है।”
— वाय. पी. सिंह, पुलिस अधीक्षक, मोहला-मानपुर
यह घटना दिखाती है कि बॉर्डर इलाकों में नक्सलियों का मूवमेंट अभी भी सक्रिय है, लेकिन सुरक्षा बलों का इंटेलिजेंस नेटवर्क अब पहले से कहीं अधिक ‘शार्प’ हो चुका है। हिड़मे और मंगेश जैसे नामों का सामने आना यह बताता है कि संगठन के बड़े खिलाड़ी अब सुरक्षित पनाहगाहों की तलाश में भटक रहे हैं। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ पुलिस का ‘जॉइंट ऑपरेशन’ इस कॉरिडोर को पूरी तरह ब्लॉक कर सकता है। हथियारों का पकड़ा जाना नक्सलियों की फायरपावर को कमजोर करेगा। अब सुरक्षा बलों का अगला कदम जंगलों में छिपे इन ‘स्लीपर सेल्स’ को पूरी तरह न्यूट्रलाइज करना होगा।



