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तेल डिपो पर प्रहार: ईरान की कमर तोड़ने की रणनीति
इजराइल की इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य मशीनरी को मिलने वाली ईंधन आपूर्ति को ठप करना है। आईडीएफ (IDF) का दावा है कि इन तेल भंडारों का इस्तेमाल ईरान अपनी मिसाइल यूनिट्स और सैन्य वाहनों के परिचालन के लिए कर रहा था। शनिवार रात से शुरू हुए इन हमलों में पहली बार नागरिक औद्योगिक ठिकानों को भी चपेट में लिया गया है। जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इजराइल के हाइफा स्थित तेल रिफाइनरी को निशाना बनाने की धमकी दी है।
ट्रम्प का कड़ा बयान: ‘ईरान अब लड़ने लायक नहीं बचेगा’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एयरफोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए इस सैन्य अभियान पर अपनी मुहर लगा दी है। ट्रम्प ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस हवाई अभियान के बाद शायद ईरान में बातचीत करने के लिए भी कोई नहीं बचेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि ईरान को “बहुत बुरी तरह” (Hit very hard) मारा जाएगा। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका और इजराइल का साझा लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमता और नेतृत्व को पूरी तरह ध्वस्त करना है।
“एक समय ऐसा आएगा जब शायद ईरान में सरेंडर (आत्मसमर्पण) बोलने वाला भी कोई नहीं बचेगा। हम उनकी सैन्य शक्ति को इस कदर नष्ट कर देंगे कि वे दोबारा खड़े न हो सकें।”— डोनाल्ड ट्रम्प, राष्ट्रपति, संयुक्त राज्य अमेरिका
“हमने ईरान के उन ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है जिनसे उनके युद्ध तंत्र को ऊर्जा मिल रही थी। यह तो बस शुरुआत है, आने वाले समय में और भी ‘सरप्राइज’ मिलेंगे।”— बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री, इजराइल
ईरान के तेल ठिकानों पर हमलों ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। दुनिया भर में इस बात का डर है कि ईरान जवाबी कार्रवाई में स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद कर सकता है, जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। आने वाले 48 घंटे युद्ध की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।


