Tuesday, February 17, 2026

भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) संपन्न: भारत की वैश्विक व्यापार सहभागिता में एक रणनीतिक उपलब्धि

16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री श्रीNarendra Modiएवं यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष महामहिम सुश्रीUrsula von der Leyenद्वारा ऐतिहासिक घोषणा
विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यूरोपीय संघ (जो वैश्विक जीडीपी का 25% हिस्सा है) के बीच विश्वसनीय साझेदारी का सुदृढ़ निर्माण
अभूतपूर्व बाज़ार पहुँच: भारत के 99% से अधिक निर्यात को यूरोपीय संघ में वरीयतापूर्ण प्रवेश, व्यापक विकास की संभावनाएँ
एमएसएमई, महिला, कारीगर, युवा एवं पेशेवरों के लिए नए अवसरों का सृजन
₹6.41 लाख करोड़ (75 अरब अमेरिकी डॉलर) के निर्यात को गति; वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लगभग 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात को विशेष लाभ
संतुलित एवं चरणबद्ध ऑटो उदारीकरण से “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात के लिए अनुकूल बाज़ार पहुँच
संवेदनशील कृषि एवं डेयरी क्षेत्रों की सुरक्षा—कोई बाज़ार पहुँच नहीं
सेवाओं में महत्वाकांक्षी एवं वाणिज्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बाज़ार पहुँच
कुशल एवं अर्ध-कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार
सीबीएएम (CBAM) प्रावधानों के माध्यम से रचनात्मक संवाद और सहयोग सुनिश्चित
भारत–ईयू एफटीए समावेशी, सुदृढ़ और भविष्य उन्मुख विकास की आधारशिला रखता है
माननीय प्रधानमंत्री श्रीNarendra Modiऔर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष महामहिम सुश्रीUrsula von der Leyenने आज 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के अवसर पर भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India–EU FTA) के संपन्न होने की संयुक्त घोषणा की। यह घोषणा भारत–ईयू आर्थिक संबंधों और प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ भारत की व्यापारिक सहभागिता में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ को खुले बाज़ार, पूर्वानुमेयता और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्ध विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित करता है। वर्ष 2022 में वार्ताओं के पुनः प्रारंभ होने के बाद गहन चर्चाओं के उपरांत यह समझौता संपन्न हुआ, जो संतुलित, आधुनिक और नियम-आधारित आर्थिक साझेदारी की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यूरोपीय संघ भारत का प्रमुख व्यापारिक भागीदार है। वर्ष 2024–25 में भारत–ईयू के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार ₹11.5 लाख करोड़ (136.54 अरब अमेरिकी डॉलर) रहा, जिसमें ₹6.4 लाख करोड़ (75.85 अरब डॉलर) का निर्यात और ₹5.1 लाख करोड़ (60.68 अरब डॉलर) का आयात शामिल है। सेवाओं का व्यापार वर्ष 2024 में ₹7.2 लाख करोड़ (83.10 अरब डॉलर) रहा।
भारत और यूरोपीय संघ क्रमशः विश्व की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ हैं तथा वैश्विक व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं। इन दोनों विविध और पूरक अर्थव्यवस्थाओं का एकीकरण अभूतपूर्व व्यापार एवं निवेश अवसरों का सृजन करेगा।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्रीPiyush Goyalने माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक दृष्टि में एक निर्णायक उपलब्धि है। यह “मेक इन इंडिया” पहल को सुदृढ़ करेगा तथा 99% से अधिक भारतीय निर्यात को अभूतपूर्व बाज़ार पहुँच प्रदान करेगा।
यह समझौता वस्तुओं, सेवाओं, व्यापार उपायों, उत्पत्ति के नियम, सीमा शुल्क और व्यापार सुगमता जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ एमएसएमई और डिजिटल व्यापार जैसे उभरते क्षेत्रों को भी शामिल करता है।
वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग वस्तुएँ और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को निर्णायक प्रोत्साहन मिलेगा। लगभग 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर 10% तक के शुल्क शून्य हो जाएंगे।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में चरणबद्ध एवं कोटा-आधारित उदारीकरण से “मेक इन इंडिया” और भविष्य के निर्यात को बल मिलेगा। भारतीय उपभोक्ताओं को उन्नत प्रौद्योगिकी और प्रतिस्पर्धा का लाभ प्राप्त होगा।
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र—जैसे चाय, कॉफी, मसाले तथाफल एवं सब्जियों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। साथ ही डेयरी, अनाज, पोल्ट्री आदि संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
सेवाओं में आईटी, पेशेवर सेवाएँ, शिक्षा, वित्तीय सेवाएँ, पर्यटन एवं निर्माण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त होंगे। यूरोपीय संघ के 144 उप-क्षेत्रों में भारतीय सेवा प्रदाताओं को पूर्वानुमेय पहुँच मिलेगी।
गतिशीलता प्रावधानों के अंतर्गत इंट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरी (ICT), व्यवसायिक आगंतुकों तथा अनुबंधित सेवा प्रदाताओं के लिए सुगम व्यवस्था की गई है। सामाजिक सुरक्षा समझौतों एवं छात्र गतिशीलता के लिए भी ढाँचा तैयार किया गया है। भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञों को भी अवसर प्रदान किए गए हैं।
बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में TRIPS प्रावधानों को सुदृढ़ करते हुए दोहा घोषणा की पुष्टि की गई है तथा भारत की पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) के महत्व को मान्यता दी गई है।
यह समझौता कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करेगा।
भारत–ईयू एफटीए भारत की 22वीं एफटीए साझेदारी है। वर्ष 2014 के बाद भारत ने मॉरीशस, यूएई, यूके, ईएफटीए, ओमान और ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं।
यह समझौता “विकसित भारत 2047” के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत को एक विश्वसनीय, गतिशील और भविष्य उन्मुख वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित करता है तथा समावेशी एवं सुदृढ़ विकास की आधारशिला रखता है।

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