Thursday, February 12, 2026

Mahashivaratri 2026: नंदी के कान में मनोकामना कहने से पहले जान लें ये 5 जरूरी नियम

नई दिल्ली।’ 12 फरवरी, 2026 हिंदू धर्म के सबसे बड़े पर्वों में से एक महाशिवरात्रि इस साल 15 फरवरी (रविवार) को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त न केवल शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं, बल्कि महादेव के परम भक्त और वाहन नंदी महाराज के चरणों में भी शीश नवाते हैं। मान्यता है कि नंदी के कानों में कही गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नंदी के दाहिने कान का ही महत्व क्यों है और इसके नियम क्या हैं?

नंदी ही क्यों हैं शिव के संदेशवाहक?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव अक्सर गहन समाधि या योग निद्रा में रहते हैं। ऐसी स्थिति में उनके ध्यान में विघ्न डालना उचित नहीं माना जाता। नंदी, जो महादेव के द्वारपाल और सबसे प्रिय भक्त हैं, हमेशा शिव की सेवा में तत्पर रहते हैं। इसलिए भक्त अपनी इच्छाएं नंदी को सौंप देते हैं, जिन्हें वे उचित समय पर शिव जी के समक्ष प्रस्तुत करते हैं।

दाहिने कान में ही क्यों बोलें अपनी बात?

शास्त्रों के अनुसार, नंदी का दाहिना कान पवित्रता और शिव के सबसे करीब होने का प्रतीक माना जाता है। नंदी का मुख सदैव शिवलिंग की ओर होता है, जो उनके निरंतर ‘शिव-ध्यान’ को दर्शाता है। जब हम उनके दाहिने कान में अपनी बात कहते हैं, तो वह सीधे उनके हृदय से होकर शिव की चेतना तक पहुँचती है।

नंदी के कान में मनोकामना बोलने के 5 जरूरी नियम

यदि आप चाहते हैं कि आपकी प्रार्थना स्वीकार हो, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें:

  1. होठों को हाथों से ढकें: नंदी के कान में बोलते समय अपने दोनों हाथों से अपने चेहरे या होठों को इस तरह ढकें कि आपकी बात कोई दूसरा न सुन सके। यह एक गोपनीय संवाद होना चाहिए।

  2. दाहिने कान का चुनाव: हमेशा अपनी मनोकामना नंदी के दाहिने कान में बोलें। हालांकि कुछ लोग दोनों कानों में बोलते हैं, लेकिन दाहिने कान का विशेष महत्व है।

  3. बुराई से बचें: नंदी के कान में कभी भी किसी दूसरे की बुराई या किसी का अहित करने वाली बात न कहें। ऐसा करना पाप का भागी बनाता है।

  4. नंदी का स्पर्श: अपनी बात कहने से पहले नंदी महाराज के चरणों को स्पर्श करें या उनके सींगों के बीच से शिवलिंग के दर्शन करें।

  5. भेंट अर्पित करें: अपनी प्रार्थना के बाद नंदी को हरा चारा, गुड़ या चना अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

“नंदी महाराज को मौन का प्रतीक माना जाता है। उनके कान में धीरे से अपनी बात कहना यह दर्शाता है कि ईश्वर हमारी अंतरात्मा की सूक्ष्म आवाज को भी सुनते हैं।”

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