Wednesday, February 11, 2026

CBSE का टेक्नोलॉजी पर बड़ा दांव: बोर्ड परीक्षा जांच प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल

नई दिल्ली — केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन में एक क्रांतिकारी बदलाव किया है। इस बार 12वीं के 17 लाख से ज्यादा छात्रों की उत्तरपुस्तिकाओं की जांच कागज पर पेन चलाकर नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर क्लिक करके की जाएगी। ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम’ के तहत करीब 32 करोड़ पन्नों को स्कैन कर डिजिटल दुनिया में उतारा जाएगा।

32 करोड़ पन्ने, 1 करोड़ कॉपियां: कैसे काम करेगा सिस्टम?

बोर्ड ने इस साल 17 फरवरी से 10 अप्रैल के बीच होने वाली परीक्षाओं के लिए पूरी तैयारी कर ली है। परीक्षा केंद्र पर ही हर छात्र की आंसर शीट के एक-एक पन्ने को हाई-क्वालिटी स्कैनर्स के जरिए डिजिटल फॉर्मेट में बदला जाएगा।

  • डिजिटल अपलोड: स्कैन की गई कॉपियों को सीधे सीबीएसई के सुरक्षित सर्वर पर अपलोड किया जाएगा।

  • ऑन-स्क्रीन मार्किंग: परीक्षक (Examiners) अपने कंप्यूटर पर इन डिजिटल कॉपियों को खोलेंगे और वहीं नंबर दर्ज करेंगे।

  • 10वीं के लिए पुराना नियम: फिलहाल यह आधुनिक व्यवस्था केवल 12वीं के लिए है। 10वीं की कॉपियां पहले की तरह पारंपरिक तरीके से ही जांची जाएंगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज के अनुसार, इस प्रणाली के पीछे कई बड़े प्रशासनिक और शैक्षणिक कारण हैं। सबसे बड़ी समस्या उत्तर पुस्तिकाओं के ट्रांसपोर्टेशन की थी, जिसमें समय और पैसा दोनों बर्बाद होते थे। डिजिटल मूल्यांकन से यह बोझ खत्म हो जाएगा।

इसके अलावा, अब शिक्षकों को मूल्यांकन केंद्रों के चक्कर नहीं काटने होंगे। वे अपने ही स्कूल में रहते हुए कॉपियां जांच सकेंगे, जिससे छात्रों की नियमित पढ़ाई में बाधा नहीं आएगी। बोर्ड का दावा है कि इस व्यवस्था से रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया तेज होगी और मानवीय गलतियों (जैसे नंबर जोड़ने में चूक) की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

पारदर्शिता और भविष्य की तैयारी

यह कदम मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी पन्ना बिना जांचे न रह जाए। डिजिटल रिकॉर्ड होने की वजह से भविष्य में पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) की प्रक्रिया भी काफी आसान और सटीक हो जाएगी।

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