रायपुर, 07 जनवरी। छत्तीसगढ़ में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अंतर्गत राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) ने राज्य के सभी नगरीय निकायों को परिपत्र जारी किया है। SUDA ने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
परिपत्र के अनुसार, सभी नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर पंचायतों को सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए की गई कार्यवाहियों की जानकारी प्रतिमाह स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के मिशन संचालक को अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी।
डोर-टू-डोर जागरूकता अभियान के निर्देश
SUDA ने नगर निगम आयुक्तों एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देशित किया है कि स्वच्छता दीदियों के माध्यम से घर-घर जाकर सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों और उसके वैकल्पिक उपायों को लेकर नागरिकों को जागरूक किया जाए। इसके साथ ही व्यावसायिक क्षेत्रों, साप्ताहिक बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आर्थिक दंड और सामूहिक सहभागिता पर जोर
परिपत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर आर्थिक दंड का प्रावधान सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इसके अलावा गैर सरकारी संगठनों (NGOs), रहवासी कल्याण संघों (RWAs) और स्वसहायता समूहों की सहभागिता से घर-घर जागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश भी सभी नगरीय निकायों को दिए गए हैं।
शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक स्थलों पर विशेष अभियान
SUDA ने शासकीय एवं अर्धशासकीय कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक उपक्रमों में कर्मचारियों व विद्यार्थियों की भागीदारी से विशेष जागरूकता अभियान चलाने को कहा है। वहीं तीर्थ स्थलों, पर्यटन स्थलों, मुख्य चौक-चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा तालाबों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर जनप्रतिनिधियों, धार्मिक गुरुओं, गणमान्य नागरिकों, स्वच्छताग्राहियों, ब्रांड एम्बेसडर्स, NGOs और स्वसहायता समूहों की सहभागिता से विशेष अभियान संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मीडिया प्रचार और रचनात्मक गतिविधियों पर फोकस
परिपत्र के माध्यम से नगरीय निकायों को सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध से जुड़े सभी कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार स्थानीय व क्षेत्रीय मीडिया तथा नगरीय निकायों के सोशल मीडिया हैंडल पर करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही विद्यालय स्तर पर चित्रकला प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और वेस्ट-टू-आर्ट प्रतियोगिताओं के आयोजन के माध्यम से बच्चों और युवाओं को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है।


