CUET परीक्षा को लेकर कुछ दिनों से काफी चर्चा हो रही है। दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के वाइस चांसलर योगेश सिंह ने एडमिशन की पॉलिसी जारी कर दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए अब CUET की परीक्षा देना जरूरी है। इसी के अंकों के आधार पर एडमिशन की मेरिट लिस्ट तैयार होगी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साथ-साथ देश की अन्य 45 सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में भी एडमिशन CUET परीक्षा के जरिए होंगे।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में पहले एडमिशन कैसे होता था?
- 12वीं क्लास के पर्सेंटेज देखे जाते थे।
- 12वीं के अंकों के आधार पर कट-ऑफ मार्क्स तय होते थे और फिर एडमिशन होता था।
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CUET के रजिस्ट्रेशन के लिए कौन से डॉक्युमेंट्स हैं जरूरी?
- 10वीं और 12वीं की मार्कशीट
- फोटो
- सिग्नेचर (स्कैन की गई कॉपी)
- फोटो के साथ ID प्रूफ (आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि)
- जाति प्रमाण पत्र, नॉन क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट (OBC सर्टिफिकेट)
कब खुलेगी CUET की ऑफिशियल वेबसाइट?
NTA ने यह जानकारी दी थी कि CUET की ऑफिशियल वेबसाइट 2 अप्रैल से खुलने वाली थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब NTA ने कहा है कि वेबसाइट 6 अप्रैल से 6 मई तक ओपन रहेगी। वेबसाइट ओपन करने पर एप्लिकेशन फॉर्म अपलोड नहीं हुआ है।CUET 2022 का रजिस्ट्रेशन कैसे कर सकते हैं?
- ऑफिशियल वेबसाइट cuet.samarth.ac.in पर जाएं।
- रजिस्ट्रेशन लिंक सामने आएगा, उस पर क्लिक करें।
- अपना और माता-पिता का नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल सहित सभी जानकारी डालकर सबमिट कर दें।
- अब पेज पर वापस जाएं और लॉग इन करें।
- लॉग इन करने के बाद एप्लिकेशन फॉर्म सामने आएगा, इसे भरें।
- अपनी फोटो और साइन अपलोड करें।
- लास्ट में एप्लिकेशन फीस भर दें।
- प्रोसेस कम्पलीट हो गई है, अब आप एप्लिकेशन का प्रिंट ले लें।
क्या है CUET?
2022-23 शैक्षणिक सत्र से ग्रेजुएशन में एडमिशन लेने का सिस्टम बदल दिया गया है। अब देश के सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए आपको 12वीं के अंकों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। एक ही कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट, यानी CUET देना होगा। इसके स्कोर के हिसाब से ही आपको कॉलेज में एडमिशन मिलेगा।CUET 2022 का एग्जाम NTA यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कंडक्ट करेगी। इससे पहले CUET के अंतर्गत सिर्फ देश की 14 यूनिवर्सिटी आती थीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी, जामिया, JNU जैसे कई बड़े संस्थान अपने यहां अलग से कट-ऑफ मार्क्स या फिर एंट्रेंस एग्जाम लेकर एडमिशन देते थे।
सवाल यह है कि
आखिर क्यों पड़ी CUET की जरूरत?
- पिछले कई वर्षों से इस बात के प्रयास जारी थे कि ढेरों एंट्रेंस टेस्ट के बजाय एक ही एंट्रेंस टेस्ट लेने की व्यवस्था की जाए, जिससे हायर एजुकेशन के दौरान स्टूडेंट्स पर एंट्रेंस टेस्ट का बोझ कम हो।
- सरकार यूनिवर्सिटी के एडमिशन के लिए बोर्ड के नंबरों को इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं थी। इसकी वजह यह थी कि देश के अलग-अलग बोर्ड में कॉपियों के जांचने का तरीका अलग है।
- कुछ बोर्ड मार्किंग में अन्य बोर्ड की तुलना में आसानी से मार्क्स दे देते हैं। इससे कुछ बोर्ड के स्टूडेंट्स को 12वीं में ज्यादा नंबर मिलने की वजह से UG कोर्स में एडमिशन में अनुचित फायदा मिलता है।
- UGC प्रमुख एम. जगदीश कुमार का कहना है कि कुछ टॉप यूनिवर्सिटीज के ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन के लिए 100 पर्सेंट का कट-ऑफ देना हास्यास्पद है। कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट देश के सभी स्टूडेंट्स को एक समान अवसर देगा।
- कुमार का कहना है कि उम्मीद है कि CUET के आने से छात्र अब 12वीं की परीक्षा में ज्यादा अंक लाने की कोशिश करने के बजाय ज्यादा ध्यान सीखने पर दे पाएंगे।
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UGC के चेयरमैन क्या कहते हैं
UGC के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार बताते हैं कि साढ़े तीन घंटे की कम्प्यूटर बेस्ड CUET परीक्षा में 12वीं की NCERT के किताबों पर आधारित मल्टिपल चॉइस सवाल आएंगे। चूंकि एग्जाम NCERT के सिलेबस पर आधारित होगा, इसलिए छात्रों को कोचिंग की जरूरत नहीं होगी।हालांकि, एक चिंता ये भी है कि ऐसे में स्टेट बोर्ड से पढ़कर आने वाले छात्र NCERT से पढ़े छात्रों से कैसे कंपीट कर सकेंगे। इस पर UGC का मत है कि देश के अधिकतर राज्यों में NCERT सिलेबस अपनाया जा चुका है पर स्टेट बोर्ड से पढ़ाई करने वालों छात्रों का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। CUET एग्जाम IIT परीक्षाओं की तरह नहीं होगी। विशेषज्ञ छात्रों के डिफिकल्ट लेवल को मॉडरेट करेंगे और एग्जाम पेपर को सिर्फ 12वीं कक्षा के सिलेबस तक ही सीमित रखेंगे।
परीक्षा कितने भाषाओं में कंडक्ट की जाएगी?
CUET एग्जाम 13 अलग-अलग भाषाओं में आयोजित होगा, ताकि देशभर के सभी छात्र अपनी पसंद की भाषा चुन सकें। इनमें इंग्लिश, हिंदी, असमी, बंगाली, मराठी, पंजाबी, गुजराती, मलयालम, कन्नड़, ओड़िया, उर्दू, तमिल और तेलुगू शामिल हैं।CUET के आधार पर सेंट्रल यूनिवर्सिटीज मेरिट लिस्ट कैसे तैयार करेंगी और छात्रों को कैसे एडमिशन मिलेगा?
CUET स्टूडेंट्स को रैंक नहीं देगा, यह केवल उन्हें मार्क्स देगा। इन मार्क्स के आधार पर प्रक्रिया में शामिल यूनिवर्सिटीज अपनी कट-ऑफ तय करेंगी। एग्जाम में गलत जवाब देने वालों की नेगेटिव मार्किंग होगी। कट-ऑफ तय करने में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में मिले अंकों का कोई वेटेज नहीं होगा।नया नियम क्या है?
- सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन में एडमिशन लेने के लिए एक ही कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी CUET देना होगा।
- 2022-23 शैक्षणिक सत्र से CUET का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी करेगी।
- सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन के लिए अप्लाई करने के लिए अप्रैल के पहले हफ्ते से आवेदन लिए जाएंगे। वहीं, छात्रों को जुलाई के पहले हफ्ते में CUET एग्जाम देना होगा।
- छात्र सेंटर पर जाकर एग्जाम देंगे। परीक्षा में मल्टीपल चॉइस सवाल आएंगे, जिनका जवाब स्टूडेंट्स कम्प्यूटर की मदद से अटैम्पट करेंगे।
- NCERT के 12वीं का सिलेबस और CUET एग्जाम का सिलेबस आपस में मिलता-जुलता हो सकता है।
- एक स्टूडेंट ज्यादा से ज्यादा 6 विषयों के लिए ही परीक्षा दे सकता है।
- 12वीं के अंकों के आधार पर दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत 45 सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एडमिशन की लिस्ट नहीं तैयार होगी।
CUET एग्जाम से छात्रों को क्या फायदा मिलेगा?
- कॉमन टेस्ट से सभी बच्चों को एक समान मौका मिलेगा।
- हर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए अलग-अलग एग्जाम नहीं देना होगा।
- 12वीं में कम अंक आने के बाद भी फेवरेट सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिल सकता है।


