बिलासपुर के बिल्हा में गुपचुप-चाट खाने से 9 साल की बच्ची की मौत हो गई है। 40 से ज्यादा लोग बीमार हैं। इनमें कई अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने हेल्थ कैंप लगाया है। सैंपल भी लिए हैं। अब रिपोर्ट का इंतजार है। दैनिक भास्कर ने इस चटपटे स्वाद का पोस्टमार्टम किया। पता चला कि हर गली-मोहल्ले और शहर से गांव तक ठेले-गुमटी में सब जगह स्वाद के चटकारे लिए जा रहे हैं, पर न कभी पानी की जांच होती है और न सैंपल लिए जाते हैं।
दरअसल, शहर से महज 20 किलोमीटर दूर बिल्हा के देवकिरारी गांव में चार दिन पहले गुपचुप-चाट खाने के बाद दर्जन भर बच्चियों के साथ ही 25 महिलाएं बीमार हो गईं। उल्टी-दस्त की शिकायत पर उन्हें अस्पताल में भर्ती में कराया गया। बच्ची की मौत हो गई। अब पुलिस उसका कारण जानने में लगी है। इसके लिए उसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ ही बिसरा रिपोर्ट का भी इंतजार है। उनको संभवत: यकीन नहीं है कि चाट-गुपचुप खाने से कोई मर भी सकता है।
टीम रियलिटी चेक करने उतरी तो दिखाई दिया कि गुपचुप के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी दुकानदार घर से बनाकर लाते हैं। पानी कैसा है, उसकी जांच कभी नहीं होती। हां, स्वाद के लिए दुकानदार खुद पानी जरूर चखता है और यही उनका सैंपल टेस्ट है। ठेले और गुमटियों में बिक रहे इन गुपचुप वालों के हाथों में ग्लव्स नहीं होते। बस पानी से भरे बर्तन में हाथ की डुबकी लगाई और भरा हुआ गुपचुप ग्राहक को परोस दिया।
टीम बिल्हा बाजार पहुंची। यहां दर्जन भर से अधिक गुपचुप-चाट के ठेले नजर आए। खाने के लिए लोगों की भीड़ थी। बेचने वाला उसी हाथ से प्लेट धोता और फिर चाट बनाते हुए दूसरे ग्राहक को गुपचुप पानी में हाथ डालकर परोस देता। शहर के हालात इससे जुदा नहीं है। रिवर व्यू रोड की चौपाटी से लेकर देवकीनंदन चौक, बृहस्पतिबाजार, कंपनी गार्डन, सत्यम टॉकीज चौक से लेकर श्रीकांत वर्मा मार्ग सहित तिफरा व आसपास के चौक-चौराहों पर भी यही स्थिति है। फर्क इतना है कि यहां पेपर प्लेट और दोनों में खिलाया जा रहा है, पर तरीका वही है।
कोरोना संक्रमण काल में प्रशासन ने होटल के साथ-साथ ठेला और गुमटियों को भी बंद करा दिया था। इसके पीछे साफ-सफाई और तेजी से फैल रहे संक्रमण को रोकना था। कोरोना संक्रमण जब कम हुआ और गुपचुप ठेले वालों को छूट मिली, तब उन्हें हाथ में ग्लव्स लगाकर गुपचुप परोसने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब वे गायब हैं। शादी-समारोह और पार्टियों में भी यही परंपरा चल रही है। हां, शहर के बड़े होटलों में गुपचुप बेचने वाले जरूर सरकारी आदेश का पालन कर रहे हैं।
बिल्हा क्षेत्र के देवकिरारी गांव में गुपचुप चाट खाकर बीमार होने के बाद स्वास्थ्य और खाद्य विभाग के अफसरों की नींद खुद गई। अफसरों ने आसपास के गांव के साथ ही बिल्हा बाजार में गुपचुप बेचने वालों के पानी की जांच के लिए सैंपल लिया है। इधर, शहर में गली-मोहल्लों के साथ ही चौक-चौराहों में बिक रखे गुपचुप वालों की टीम ने एक भी बार पानी के सैंपल नहीं लिए है और न ही ठेलों में साफ-सफाई वगैरह की जांच की है।
टीम देवकिरारी और बिल्हा के पत्थरखान गांव भी पहुंची। यहां ग्रामीणों से बातचीत में पता चला कि गुपचुप बेचने वाला रघु कुंभकार पिछले 15-20 साल से कारोबार कर रहा है। वह आसपास के गांव-गांव में जाकर बाजार में और बिल्हा में गुपचुप बेचता है। जिस दिन देवकिरारी गांव की महिलाएं व बच्चियां बीमार हुई, उस दिन उसने बिल्हा के तहसील ऑफिस के साथ ही मोहल्ले में भी गुपचुप खिलाया था। लेकिन, गुपचुप खाने से देवकिरारी गांव के लोग ही बीमार हुए। बाकी दूसरे जगह के लोगों को कोई परेशानी नहीं हुई। ऐसे में उन्होंने फूड प्वाइजनिंग की घटना को लेकर ही सवाल उठने लगे।


