निठल्लों का औज़ार सोशल मीडिया’ का विमोचन संपन्न 

श्री राजशेखर चौबे ,रायपुर के तीसरे व्यंग्य संग्रह निठल्लों का औज़ार सोशल मीडिया के ऑनलाइन विमोचन कार्यक्रम संपन्न हुआ जिसमें देश भर के जाने माने व्यंग्यकारों ने शिरकत की।यह कार्यक्रम लखनऊ के वरिष्ठ साहित्यकार बलदेव त्रिपाठी जी की सतत साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के संचालक दिल्ली के प्रख्यात व्यंग्य आलोचक डॉ. रमेश तिवारी जी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए बताया कि इस संग्रह का पहला व्यंग्य वर्चुअल मीटिंग है और हम इसका विमोचन भी इसी माध्यम से कर रहे हैं।यह भी एक सुखद संयोग है।इसके बाद इस व्यंग्य के एक अंश का उन्होंने पाठ किया।दुर्ग के वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री विनोद साव ने राजशेखर जी की पारिवारिक विरासत के बारे में विस्तार से बताया।उन्होंने बताया कि वे व्यंग्य की चर्चा के लिए प्रायः उनके पास रायपुर से दुर्ग आते थे।उन्होंने यह बताया कि इस संग्रह की पचास रचनाओं में तेरह रचनाएँ कोरोना पर केंद्रित हैं जो उनके सरोकार का स्पष्ट उदाहरण है।राजशेखर जी ने संग्रह की रचनाओं के बारे में बताया कि उन्होंने कोरोना,तालाबंदी और किसान आंदोलन जैसे जनोन्मुखी मुद्दों पर अपनी कलम चलाई है । रायपुर के वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ स्नेहलता पाठक ने उनके लेखन के विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की।रायपुर से ही वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ महेन्द्र कुमार ठाकुर ने बताया कि राजशेखर जी लेखन के अलावा सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं।तालाबंदी के दौरान अपनी संस्था व साथियों के साथ मिलकर प्रवासी भाइयों बहनों के लिए रोज़ सौ लोगों के लिए भोजन का प्रबंध करते रहे।भोपाल से जुड़े वरिष्ठ व्यंग्यकार अरुण अर्णव खरे ने व्यंग्य के कुछ अंश पढ़कर सुनाए।दिल्ली से जुड़े वरिष्ठ व्यंग्यकार सुभाष चन्दर ने बताया कि राजशेखर जी के व्यंग्यों में सरोकार मौजूद है।उन्होंने ने देश की विसंगतियों पर पूरी साहसिकता के साथ अपनी कलम चलाई है।उन्होंने न केवल विसंगतियों को रेखांकित किया है बल्कि उन पर प्रहार करने का प्रयास भी किया है।उन्होंने शिल्प पर मेहनत करने की सलाह भी दी।दिल्ली से ही जुड़े वरिष्ठ व्यंग्यकार सुनील जैन राही ने इस संग्रह के कुछ अंशों को उद्धृत किया और विस्तार से चर्चा की।जबलपुर से जुड़े वरिष्ठ व्यंग्यकार रमेश सैनी जी ने उनके आज ही जनवाणी अखबार में छपे व्यंग्य की चर्चा की और बताया कि वे सामयिक विषयों पर तुरंत ही प्रभावशाली व्यंग्य का सृजन कर लेने की क्षमता रखते हैं।
अन्य वरिष्ठ व्यंग्यकारों में डॉ. किशोर अग्रवाल रायपुर, प्रभाशंकर उपाध्याय सवाई माधोपुर, वीरेन्द्र सरल, धमतरी ने भी अपने विचार साझा किए।इस विमोचन कार्यक्रम में श्री शांतिलाल जैन, हरीश कुमार सिंह, बलदेव त्रिपाठी, रामस्वरूप दीक्षित, विवेक रंजन श्रीवास्तव, डा. तीरथ सिंह खरबंदा,महेश राजा,टीकाराम साहू आज़ाद,अभिजित कुमार दुबे,एन कुमार,राजेश अग्रवाल, लोकेश कावड़िया,सुबोध साव,संजय पेंढारकर,सुशील दुबे, संतोष साव,शिरीष श्रीवास्तव,रश्मि शुक्ला,निमिष तिवारी, अपूर्वा चौबे भी उपस्थित थे।इस संग्रह के प्रकाशक वरुण माहेश्वरी भी उपस्थित थे।अंत में डॉ रमेश तिवारी जी ने सबके प्रति आभार प्रकट किया।
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