रायपुर आजादी के अमृत महोत्सव के तहत छत्तीसगढ़ के हर जिले में 75-75 अमृत सरोवर बनाए जाएंगे। इसके तहत हजारों मनरेगा के मजदूरों को काम मिलेगा। प्रदेश के सभी 28 जिलों में कुल 2100 अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य है। मनरेगा के अधिकारियों के मुताबिक कुछ जिलों में जैसे दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव में करीब 25 तालाबों के सुंदरीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। खासकर गांव के तालाबों में सुंदरीकरण से यहां पशुओं को स्वच्छ जल और लोगों के लिए निस्तारी जल मिलेगा। इससे आसपास के इलाके के जल संंग्रहण के कारण जल स्तर भी बढ़ेगा। साथ ही वनांचलों में इस पानी को सिंचाई के कार्य में भी प्रयोग में लाया जाएगा।
छत्तीसगढ़ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए कार्ययोजना तैयार की है। रायपुर समेत प्रदेशभर में जिला पंचायत के कार्यपालन अधिकारी और जिला कलेक्टर इनकी मानिटरिंग कर रहे हैं। रायपुर के जिला पंचायत के कार्यपालन अधिकारी मयंक चतुर्वेदी के मुताबिक रायपुर में 75 अमृत सरोवर बनाने के लिए जगह का चयन किया गया है। इसमें पहले से निर्मित तालाबों के सुंदरीकरण से लेकर नए तालाबों के निर्माण तक के काम शामिल हैं।
एक अनुमान के मुताबिक अकेले सुंदरीकरण किया गया तो एक तालाब विकसित करने में पांच से छह लाख रुपये खर्च होंगे। इस तरह से यह खर्च यदि नए सिरे से तालाब बनवाया गया तो क्षेत्र के हिसाब से 50 लाख रुपये तक बढ़ भी सकता है। इन तालाबों को विकसित करने के लिए पंचायत की स्थानीय निधि और खनिज निधि का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा मनरेगा योजना के तहत मजदूरों से सीधे काम लेंगे। एक साल के भीतर तालाबों के सुंदरीकरण के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। अमृत सरोवर बनाने का जिम्मा ग्रामीण विकास विभाग के साथ मनरेगा, जल संसाधन और वन विभाग को सौंपा गया है।


