* “सामर्थ्यवान”*
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*रीतिका दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षा की पढ़ाई करने आई थी। उसकी कक्षाएं रात्रि में काफ़ी देर से समाप्त होती थी। गर्मियों में तो फिर भी ठीक था पर सर्दियां आते-आते रात को सड़कें सुनसान होने लगी थी।*
*अक्सर लौटते में उसके कई दोस्त भी होते थे तो उनके साथ वो बस स्टॉप आ जाती थी। एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि जिन दोस्तों के साथ वो बस स्टॉप तक आती थी वो लोग नहीं आए थे। कक्षा के समाप्त होने में भी थोड़ा समय ऊपर हो गया।*
*वो अकेले ही कक्षा से बस स्टॉप के लिए निकली। इसी बीच कुछ मनचले लड़के भी उसके पीछे लग लिए। वो उस पर काफ़ी अश्लील फब्तियां कस रहे थे।*
*रीतिका बिना कुछ प्रतिक्रिया किए भागते-दौड़ते बस स्टॉप पहुंची पर आज बस जा चुकी थी। अब अगली बस कितनी देर में आएगी उसका ठिकाना नहीं था।*
*वो बहुत सहमी हुई थी इतने में ही एक सरदार जी,जो कि ऑटो चलाते थे वहां आकर रुके। स्थिति को भांपते हुए रीतिका से पूछने लगे कि उसको कहां जाना है?*
*रीतिका को समझ नहीं आ रहा था पर उसके सामने और कोई रास्ता नहीं था।सरदार जी इस समय उसके लिए तिनके का सहारा साबित हुए थे।*
*वैसे तो सरदार जी उस समय अपने घर लौट रहे थे जो रीतिका के घर से बिल्कुल विपरीत दिशा में था पर उस समय उन्हें रीतिका की मदद करना ज्यादा मुनासिब लगा।*
*वो मनचले लड़के अभी भी नहीं माने और रीतिका के ऑटो में बैठते ही बाइक से भी पीछा करने लगे थे।*
*सरदार जी ने उनको पीछा करते देख,ऑटो को रोका, बाहर आए और ललकार कर बोले कि अगर एक कदम भी अब साथ चले तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा।*
*सरदार जी के हट्टे-कट्टे और रोबदार शरीर को देखकर उन लड़कों की सिट्टीपिट्टी गुम हो गई।वैसे भी पुलिस की गाड़ी की पेट्रोलिंग की आवाज़ भी आ रही थी। अब उन लड़कों को वहां से निकलने में भलाई लगी।*
*वो तो चले गए पर रीतिका बहुत डरी हुई थी। वो सरदार जी की बहुत एहसानमंद थी। सरदार जी ने उसकी हालत भांपते हुए कहा कि बेटा कभी-कभी ज़िंदगी में कुछ अनचाहे हालात बन जाते हैं पर उसकी वजह से घबराकर पढ़ना-लिखना मत छोड़ना।*
*अगर पीछा करने वाले आवारा लड़के हैं तो कहीं ना कहीं ऐसे लोग भी हैं जो बहन-बेटी की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। मेरा तो ये भी मानना है कि कई बार कोई मदद के लिए ना भी पहुंच पाए तब भी बेटी-बहन खुद ही इतनी सामर्थ्यवान हो कि ऐसे मनचले लोग उनकी तरफ आंख भी ना उठा पाएं।*
*रीतिका को सरदारजी की बात समझ आ रही थी। अब उसने पढ़ाई के साथ-साथ सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग लेनी भी शुरू कर दी। रीतिका ने अपने आस-पास की लडकियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया।*
*ज़िंदगी में कई लोग ऐसे टकरा जाते हैं कि जिनसे जीवन भर का रिश्ता बन जाता है। कहने को तो सरदार जी ऑटो वाले ही थे पर वो रीतिका के लिए तिनके का सहारा बनकर आए थे


