Thursday, February 19, 2026

महतारी दुलार योजना से अभी भी कई बच्चे वंचित:बैंकों में खाते नहीं…पिता का नाम गलत… इसलिए महतारी का दुलार अब भी सैकड़ों अनाथ बच्चों से दूर

प्रदेश में सरकार की सबसे संवेदनशील महतारी दुलार योजना का लाभ अब भी सैकड़ों बच्चों तक नहीं पहुंच सका है। कोरोना की वजह से अनाथ हुए बच्चों को सरकार ने पढ़ाने सालभर पहले इस योजना की घोषणा की थी।

इसमें 6 हजार 388 बच्चों के आवेदन के बाद उन्हें पात्र पाया गया है। इनमें से अब तक 2866 बच्चों को ही स्कॉलरशिप मिल सकी है। 3 हजार 522 बच्चे इससे वंचित हैं। इनमें मृत सरकारी कर्मचारियों के अलावा प्राइवेट नौकरी करने वालों या मजदूरों के बच्चे भी शामिल हैं।

सरकार ने सप्लीमेंट्री बजट में चार करोड़ रुपयों का प्रावधान किया था। इनमें से दो करोड़ रुपए पहले ही दे दिए थे। बाद में फरवरी दो करोड़ रुपए और जारी किए गए। अब नए बजट में अप्रैल से फिर अप्रैल में राशि मिलने पर बच्चों के खातों में जमा कराई जाएगी।

पहली किस्त समय पर मिलने के बाद भी कई बच्चों को समय पर लाभ नहीं मिल सका था। सरकारी स्कूल के उन बच्चों को जिनके खाते खुल गए हैं, राशि जमा करा दी गई। निजी स्कूलों में पढ़ रहे ज्यादातर अनाथ बच्चों को यह स्कॉलरशिप नहीं मिली है।

स्कॉलरशिप सीधे शिक्षा संचालनालय से ही बच्चों के खातों में जमा कराई जा रही है।
रायपुर में 1088 में से केवल 362 केस ही निपटे हैं। डीईओ अशोक कुमार बंजारा ने भी माना कि बैंक खातों को लेकर ही ज्यादा परेशानी आ रही है। विद्यार्थियों के खाते खुलना जरूरी है, क्योंकि राशि खातों में ही जमा होगी। सरगुजा में 71 में से 43 बच्चों को लाभ मिल सका है। डीईओ संजय गुहे के अनुसार जो कमियां -खामियां एकाउंट नंबरों को लेकर विभाग ने फाइंड – आउट की थी, उन्हें दूर कर दिया गया है। पोर्टल में भी जानकारी अपलोड कर दी गई है।

क्या हैं मुख्य अड़चनें

  • बच्चों ने बैंक खाते नहीं खुलवाए
  • आवेदन में एकाउंट नंबर गलत लिखे
  • दादा की मृत्यु पर भी आवेदन कर दिया
  • पिता का नाम गलत भर दिया
  • बैंकों में खाते खोलने की जटिल प्रक्रिया

क्या है मामला
पिछले साल गर्मियों में कोरोना दूसरी भयावह लहर में सैकड़ों बच्चों माता-पिता नहीं रहे। इन अनाथ बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सरकार ने ली थी। राज्य शासन ने कक्षा पहली से आठवीं तक के छात्रों को 500 रुपए एवं 9-12 वीं के छात्रों को 1000 रुपए प्रतिमाह छात्रवृति देने का प्रावधान किया।

जिन बच्चों के माता या पिता की मृत्यु कोरोना बीमारी से हुई है उनकी भी फीस राज्य शासन देगा। शिक्षा विभाग द्वारा जिला स्तर पर योजना ऐसे छात्रों के आवेदन एक निर्धारित प्रपत्र जमा किए हैं। घर से अकेले कमाऊ सदस्य या मुखिया की मौत वाले बच्चों को आत्मानंद अंग्रेजी स्कूलों में प्रवेश दिया गया है, उनसे फीस नहीं ली जा रही है।

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