जिद से मिला जिला : पूरी हुई 39 साल पुरानी साध, 11 महीने आमरण अनशन, 13 दिन कर्फ्यू के बाद मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर बना जिला

कोरिया। आखिरकार जिद ने जिला दिला ही दिया। 39 साल की जिद, 11 महीने का आमरण अनशन और 13 दिन के कर्फ़्यू ने आखिरकार मनेन्द्रगढ़- चिरमिरी- भरतपुर को जिला बना ही दिया। सोमवार को राज्य सरकार ने यहां ओएसडी की भी नियुक्ति कर दी। आईएसएस पीएस ध्रुव नवगठित जिले मनेन्द्रगढ़- चिरीमरी- भरतपुर के ओएसडी होंगे। 15 अगस्त को घोषित हुए नए जिले मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर को 8 माह बाद ओएसडी मिल ही गया। इस नवगठित जिले के बनने के संघर्षों की दास्तां पर पढ़िए हरिभूमिडाट काम की इनसाइड स्टोरी… ऐसे हुई शुरुआत मनेंद्रगढ़ जिला बनाओ संघर्ष समिति के बैनर तले पहली बार साल 1983 में जिला बनाने की मांग उठी। 29 जनवरी 1983 से क्रमिक आमरण-अनशन की शुरुआत हुई जो 84 दिन चली। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने चर्चा करने मनेंद्रगढ़ से एक प्रतिनिधिमंडल को भोपाल बुलाया था। स्व. रतन लाल मालवीय के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल को भोपाल भेजा गया था। इस दौरान न्यायमूर्ति बीआर दुबे को आयोग का अध्यक्ष बनाने की अनुशंसा और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी के मध्य साजा पहाड़ में जिला मुख्यालय बनाने मांग रखी गई। दुबे आयोग ने बैकुंठपुर को जिला बनाने के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था। हालांकि राज्य शासन ने वर्ष 1998 में सरगुजा को विभाजित कर बैकुंठपुर (पश्चिमी सरगुजा, वर्तमान में कोरिया) को अस्थायी रूप से जिला मुख्यालय घोषित कर दिया। इससे मनेंद्रगढ़ के नागरिक नाराज हो गए और वृहद आंदोलन शुरू कर दिया।

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