Wednesday, February 18, 2026

चिंतन मनन

कैसे जियेंगे अपनी बाकी जिंदगी ?

एक डॉक्टर थे , वे बहुत ही होशियार थे ।

उनके बारे में यह कहा जाता था कि वह मौत के मुंह से भी बीमार व्यक्ति को वापस ले आते थे ?

लेकिन डॉक्टर साहब की एक विशेषता थी कि उनके पास जो भी मरीज आता था वे उनसे एक फॉर्म भरवाते थे ?

वह मरीज से यह कहते थे कि आप इस फार्म में लिखें कि यदि आप बच गये तो किस तरह से अपनी बाकी जिंदगी जियेगें ? और आपके जीवन में क्या करना शेष रह गया है जो आप करना चाहेंगें ?

सभी मरीज अपने – अपने मन की बात कुछ इस प्रकार लिखते ?

अगर मैं बच गया तो अपने परिवार के साथ अपना समय बिताऊंगा ?

मैं अपने पुत्र और पुत्री की संतानों के साथ जी भर कर खेलूंगा ?

किसी ने जी भर कर पर्यटन ( घूमने का ) शौक पूरा करने के बारे में लिखा ?

किसी ने तो यह भी लिखा कि मेरे द्वारा जिंदगी में यदि किसी को ठेस पहुंची है तो मैं उससे माफी मांगूंगा ?

किसी ने लिखा कि मैं अपनी जिंदगी में मुस्कुराना बढ़ा दूंगा ?

जिंदगी में किसी से भी शिकायत नहीं करूंगा और ना किसी को शिकायत का मौका दूंगा ?

किसी का भी मन न दुखे , मैं ऐसा काम करूंगा ?

बहुत से लोगों ने तरह-तरह की बातें लिखीं ?

डॉक्टर आपरेशन करने के बाद जब मरीज को छुट्टी देते तब वह लिखा हुआ फार्म उन्हें वापस कर देते थे ?

डॉक्टर ने कहा कि एक भी व्यक्ति ने ऐसा नहीं लिखा कि अगर मैं बच गया तो मुझे किसी से बदला लेना है ?

या फिर मुझे अपने दुश्मन को खत्म करना है

या फिर मुझे बहुत धन कमाना है ?

 

डॉक्टर ने मरीजों से प्रश्न किया कि जब आप स्वस्थ थे तब आपने इस तरह का जीवन क्यों नहीं जिया ? आपको कौन रोक रहा था ? डॉक्टर की यह बात सुनकर सभी मरीजों के चेहरे शर्म से झुक जाते थे ?

तब वे सभी मरीजों को एक सलाह देते थे कि अभी भी देर नहीं हुई है ?
कुछ क्षण अपने जीवन के बारे में चिंतन मनन करो ? हमें अपनी जिंदगी में किस तरह का जीवन जीना शेष रह गया है , जो हम जीना चाहते थे ? बस उसी तरह का जीवन जीना प्रारम्भ कर दो ?

क्योंकि जीवन का आनंद तभी है जब जीवन यात्रा पूर्ण हो तब कोई कामना शेष न रहे , और कोई अफ़सोस भी ना रहे ? मन में यह न रहे कि मैं जैसा जीवन जीना चाहता था , वैसा जीवन नहीं जी सका ?

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