चिंतन मनन

मैं हिन्दी हूँ ।।*

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मैं सूरदास की दृष्टि बनी

*तुलसी हित चिन्मय सृष्टि बनी*

मैं मीरा के पद की मिठास

*रसखान के नैनों की उजास*

मैं हिन्दी हूँ ।।

*मैं सूर्यकान्त की अनामिका*

मैं पन्त की गुंजन पल्लव हूँ

*मैं हूँ प्रसाद की कामायनी*

मैं ही कबीरा की हूँ बानी

*मैं हिन्दी हूँ ।।*

खुसरो की इश्क मज़ाजी हूँ

*मैं घनानंद की हूँ सुजान*

मैं ही रसखान के रस की खान

*मैं ही भारतेन्दु का रूप महान*

मैं हिन्दी हूँ ।।

*हरिवंश की हूँ मैं मधुशाला*

ब्रज, अवधी, मगही की हाला

*अज्ञेय मेरे है भग्नदूत*

नागार्जुन की हूँ युगधारा

*मैं हिन्दी हूँ ।।*

मैं देव की मधुरिम रस विलास

*मैं महादेवी की विरह प्यास*

मैं ही सुभद्रा का ओज गीत

*भारत के कण-कण में है वास*

मैं हिन्दी हूँ ।।

*मैं विश्व पटल पर मान्य बनी*

मैं जगद् गुरु अभिज्ञान बनी

*मैं भारत माँ की प्राणवायु*

मैं आर्यावर्त अभिधान बनी

*मैं हिन्दी हूँ।।*

मैं आन बान और शान बनूँ

*मैं राष्ट्र का गौरव मान बनूँ*

यह दो तुम मुझको वचन आज

*मैं तुम सबकी पहचान बनूँ*

मैं हिन्दी हूँ।।lllllllllll

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