Thursday, February 19, 2026

इमरान ने बुलाई कैबिनेट मीटिंग, देश को संबोधित भी करेंगे; विपक्ष के जश्न के बीच फौज ने ओढ़ी खामोशी

अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने और नेशनल असेंबली भंग करने के मुद्दे पर इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी है। इसके तुरंत बाद इमरान खान ने आज यानी शुक्रवार को कैबिनेट की मीटिंग बुलाई है। इसके बाद वे शाम को एक बार फिर देश को संबोधित करेंगे। इमरान ने गुरुवार रात को ट्वीट कर यह जानकारी दी। दूसरी तरफ, विपक्ष ने कहा है कि वो जीत का जश्न मना रहा है।

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में सियासी ड्रामे को लेकर 4 दिन चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने गुरुवार रात को कहा- अविश्वास प्रस्ताव खारिज करना और नेशनल असेंबली भंग करना, दोनों काम गैरकानूनी थे। प्रधानमंत्री इमरान खान को यह अधिकार नहीं है कि वो राष्ट्रपति से संसद भंग करने को कहें। अदालत के फैसले के बाद इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेताओं ने इमरान के घर मीटिंग की।

कोर्ट से टकराव नहीं चाहते इमरान खान
PTI के सूत्रों ने कहा- गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इमरान खान के घर पर पार्टी नेताओं की बैठक हुई। इसमें तय यह हुआ है कि PTI इसे किसी भी सूरत में टकराव का मुद्दा नहीं बनाएगी। हम अवाम के सामने अपना पक्ष रखेंगे और बताएंगे कि यह पूरी साजिश विपक्ष ने अमेरिका के साथ मिलकर रची थी। बहुत जरूरी हुआ तो वो खत भी जनता के सामने लाया जाएगा, जिसे इमरान ने 27 मार्च की इस्लामाबाद रैली में लहराया था। पार्टी किसी भी हाल में अपने को कमजोर नहीं दिखने देगी। इस बार चुनाव में बहुत सोच समझकर टिकट दिए जाएंगे।

विपक्ष की रैली में हो सकता है नवाज का संबोधन
विपक्ष की तैयारी यह है कि वो इस्लामाबाद में एक रैली निकाले। इसके बाद उसके नेता बारी-बारी से मीडिया से बात करेंगे। बहुत मुमकिन है कि इस रैली को नवाज शरीफ लंदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करें।

विपक्षी गठबंधन के चीफ मौलाना फजल-उर-रहमान का कहना है कि उनका गठबंधन मुल्क के चारों प्रांतों में से किसी में भी इमरान खान की पार्टी को सत्ता में नहीं आने देगा। रहमान ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोकतंत्र की जीत और तानाशाही की हार है। इससे ज्यादा कुछ नहीं। हम रहें न रहें। इस मुल्क में लोकतंत्र रहना चाहिए।

इमरान खान को सत्ता में लाने वाली फौज का प्रयोग नाकाम हो चुका है। पाकिस्तानी मीडिया के सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फौज भी खुश हैं क्योंकि इमरान की नीतियां उसके लिए खतरनाक साबित होने लगी थीं। जब से खान ने अमेरिका का नाम लेना शुरू किया, तब से फौज को खुद की फिक्र सताने लगी थी। जनरल बाजवा और इमरान के बीच दूरियां पिछले साल अक्टूबर से ही बढ़ने लगी थीं।

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